गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

"नववर्ष मंगलमयी हो"

हे ईश्वर,
हम सभी ने,
पूर्ण की परिक्रमा,
सूर्य की एक और।
इस परिक्रमा मे,
कुछ छूट गए,
सदा के लिए,
कुछ रह गए,
थोड़ा पीछे,
कुछ आगे आगे,
ही रहे।
पर गोल चक्कर मे,
आगे पीछे तो सब,
होता है सापेक्ष।
बस आपकी बनी रहे,
अनुकम्पा,
सभी पर,
है यही प्रार्थना।
इस नई परिक्रमा में,
सब का हो,
उत्साह नया,
जोश नया,
एक उत्सव सा,
एक अवसर सा।
और कुछ की चाह नहीं,
पर संजोए रखना प्रभु,
जो कुछ भी है हासिल।
आ पाऊं औरों,
के काम,
कर सकूं जीवन,
सार्थक अपना,
बस इतनी सी अभिलाषा।
"नववर्ष २०११ सभी  के लिए अभूतपूर्व रूप में मंगलमयी हो"

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर भाव.नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही अच्छी अभिलाषा की है कविता में आप ने.ईश्वर की अनुकम्पा,
    सभी पर बनी रहे ऐसी प्रार्थना हम भी करते हैं.

    ****नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !*****

    उत्तर देंहटाएं
  3. भावपूर्ण कविता.
    नए साल की हार्दिक शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  4. भावपूर्ण रचना. आभार.

    अनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
    तय हो सफ़र इस नए बरस का
    प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
    सुवासित हो हर पल जीवन का
    मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
    करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
    शांति उल्लास की
    आप पर और आपके प्रियजनो पर.

    आप को भी सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर,
    डोरोथी.

    उत्तर देंहटाएं