शनिवार, 25 दिसंबर 2010

"उधार आंसुओं का"

यह माना कि प्यार,
किया था बहुत तुमने मगर,
कम हम भी ना तड़पे थे उस रोज़,
जब मांगा था तुमने हिसाब आंसुओं का।
चार-छेः आंसू बहा कर,
दर्ज कर लिया बही मे तुमने  उन्हें,
और चाहते हो अब कि,
जीवन भर डूबा रहूं,
कर्ज में उन्हीं आंसुओं के।
सच तो यह था कि,
जब जब बहे आंसू तुम्हारे,
भिंचती रही मुठ्ठियां मेरी,
और समाता रहा उनमें,
बांध मेरे आंसुओं का।
पर आज खोल बैठा हूं,
मुठ्ठियां अकेले में,
और जार जार बह रहे आंसू।
शायद इस तरह,
लौटा रहा हूं उधार,
तुम्हारे आंसुओं का ।

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही प्यारी रचना.......हिसाब आँसूओं की....क्या बात है।

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  2. ्जो प्यार तूने मुझको दिया था
    वो प्यार तेरा मै लौटा रहा हूँ

    ये गीत याद आ गया आपकी रचना पढकर्।

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  3. और समाता रहा उनमें,
    बांध मेरे आंसुओं का।
    अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई

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  4. इस तरह लौटा रहा हूँ उधार तुम्हरे आंसुओं का ..
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति! ...
    बैक ग्राउंड का कला रंग आँखों को चुभता है !

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  5. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 28 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  6. आप सभी से इतना स्नेह एवं आशीर्वाद मिलने से मन पुलकित हो उठता है, बहुत बहुत आभार।
    वाणी गीत जी आपके मत से सहमत होते हुए मैने "काला" रंग हटा लिया है।

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  7. और चाहते हो अब कि,
    जीवन भर डूबा रहूं,
    कर्ज में उन्हीं आंसुओं के।


    hmm.amit ji..bahut achii rchnaa lgii mujhe......

    aapko.spriwaar nav varsh ki shubhkaamnaayen

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  8. और समाता रहा उनमें,
    बांध मेरे आंसुओं का।
    पर आज खोल बैठा हूं,
    मुठ्ठियां अकेले में,
    और जार जार बह रहे आंसू।
    भावमय करते शब्‍द ।

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  9. प्यार में ..यह हिसाब-किताब मुझे समझ नहीं आया .

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  10. इस रचना में आँसुओं में घुलता प्यार साफ़ नज़र आ रहा है ।प्यार अक्सर दर्द देता है और आँसू उस दर्द पर मरहम ।बहुत सुन्दर .. आँसुओं का उधार आँसू ही अदा करते हैं ।

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  11. इस रचना में आँसुओं में घुलता प्यार साफ़ नज़र आ रहा है ।प्यार अक्सर दर्द देता है और आँसू उस दर्द पर मरहम ।बहुत सुन्दर .. आँसुओं का उधार आँसू ही अदा करते हैं ।

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