रविवार, 5 अप्रैल 2026

मन

पेड़ों के गलों में हाथ डाल चहलकदमी करने का जी करता है। 

हवाओं के रुख से बाल संवारने को जी करता है।

चिड़ियों से चोंच मिलाने का जी करता है।

तितलियों को पलकों पे धरने का जी करता है। 

शंख के कान में फुसफुसाने का जी करता है।

चांद की रोशनी में नदी का कोना खींच ओढ़ लेने का जी करता है। 

"अंगुलियों का अंगुलियों से बात करने का जी करता है।"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें