बीती रात एक समूची नींद नहीं थी,अक्सर ऐसा होता है अब।
छोटे छोटे से टुकड़ों में अलग अलग बनती बिगड़ती रहती है।हर एक छोटी सी नींद के टुकड़े में बड़े बड़े ख्वाब उगते रहते हैं।
तुम्हे बोनसाई से बहुत प्यार है न। बरगद ,पीपल जैसे वृक्ष छोटे छोटे से गमलो में।
ख्वाबों के भी बोनसाई बना लिए है अब मैंने , छोटी छोटी सी नींद के गमलों में।
यह ख्वाब पास से छू कर देखना ,पसंद आएंगे तुम्हे।

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