रविवार, 12 अप्रैल 2026

गेहूँ की कटाई

आग जलने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है, इसे फायर ट्रायंगल भी कहते है, ऑक्सीजन, जलने वाला पदार्थ और अग्नि। इसे बुझाना हो तो या तो आग के ऊपर ऐसी परत बना दी जाए जो ऑक्सीजन को खत्म कर दे जैसे फोम की लेयर, बालू, या पाउडर कोई, या जलने वाला पदार्थ ही खत्म हो जाये अथवा अग्नि को ही बुझा दें।

सबसे कारगर होता है ऑक्सीजन को ही विलुप्त कर देना। परन्तु बड़े स्तर पर लगी आग को बुझाना मुश्किल होता है।

उत्तरकाशी में पोस्टिंग के दौरान देखा था कि पहाड़ों के जंगल मे लगी आग महीनों तक जलती रहती है। रात को ऐसे लगता था जैसे पूरे पहाड़ पर गेंदे की माला बहुत सारी लिपटी हो ,धधकती हुई। 

उस दौरान पता चला कि ऐसी आग को बुझा पाना सम्भव नही होता परन्तु आगे बढ़ने से रोका जाता था। उसके लिए आग वाले क्षेत्र से दूर उल्टी आग खुद लगाई जाती थी जो जलती हुई आग की तरफ बढ़ती थी।

इससे फैलती हुई आग और उल्टी आग के बीच जलने वाला पदार्थ जल कर समाप्त हो जाता था और आग का विस्तार एक निश्चित सीमा पर रुक जाता था।

आजकल प्रचंड गर्मी में खेतों में गेहूँ की कटाई का काम हो रहा है। खेतों में ही बिजली की लाइन गुजरती है और कहीं कहीं वहीं खेत के कोने में ट्रांसफॉर्मर भी लगा होता है। हवा तेज चलने पर तार लड़ते है या चिड़िया के टकराने से चिंगारी छोटी सी गिरती है और पल भर में गेहूँ के खेत मे विकराल आग लग जाती है। यही स्थिति ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी के कारण भी होता है।

इससे बचने का उपाय यह है कि कटाई शुरू करते समय सबसे पहले बिजली की लाइन के नीचे और टांसफार्मर के आसपास के हिस्से की कटाई कर लें जिससे चिंगारी गिरने से वहां जलने वाला पदार्थ हो ही न।

इसी प्रकार पड़ोसी के खेत से भी अपने खेत को कटाई कर उससे अलग कर ले जिससे यदि पड़ोस के खेत मे आग लगे तो भी अपना खेत बच सके।

आजकल हार्वेस्टिंग मशीन से भी कभी कभी चिंगारी निकलती है उससे भी बचाव किया जाना चाहिए।

खड़ी फसल का यूँ जल कर समाप्त हो जाना बहुत पीड़ा देता है।



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