गुरुवार, 2 जुलाई 2026

बारिश संग भुट्टा।



बारिश में ड्राइव करते हुए भुट्टा खाना मेरी पसंद की लिस्ट में सबसे ऊपर है। एक हाथ से ड्राइव और दूसरे हाथ मे भुट्टा घुमाते घुमाते खाते हुए गाना सुनने का एक अजीब सा मिजाज होता है। 

निगाह तो सामने सड़क पर होती है और गोल घुमाते हुए भुट्टे के दाने दांतों के नीचे आते रहते है। कभी कच्चा सा दाना कच से अपना दूध छोड़ देता है तो कभी एकदम जला हुआ दाना कर्र कर्र करता हुआ कोयला सा जीभ पर ठहर उठता है।

यह रोटेटिंग भुट्टा हाथ मे एकदम ज़िन्दगी की तरह ही तो होता है, कभी चटपटा कभी ,कचकचा और कभी जला हुआ फिर भी स्वाद देता हुआ और सबसे खास बात यह कि जब  और खाने का मन करता है तभी एकदम से खत्म हो जाता है।

यही ज़िन्दगी है।

मंज़िलें।

 #मंजिल #मकान #की #या #ज़िन्दगी #की


मकान ऊँचा था ,

इंसान इतराया,

वक्त भी बौना लगा।

वक्त रीता ,

रीता रेत भी ,

आसमान मुस्कुराया।

वक्त फिसल गया,

हाथ छूट गया,

इंसान बौना रह गया।

सीमेंट रेत सरिया,

खुद कभी मजबूत कहाँ,

वक्त ही निभाता इन्हें।

"वक्त गर मजबूत ,

झोपड़ी को भी हासिल हुनर ,

पनाह का महलों को।"


©अमित

मंगलवार, 30 जून 2026

ज़िंदगी

ज़िन्दगी को अपनी ओर खींचते खींचते हाथ कब सद्दी से मांझे पर आ गया ,पता ही नही चला और अंगुलियां लहूलुहान हो गईं।

"कुछ लम्हे मांझे सरीखे होते हैं , जो कत्ल भी करने का माद्दा रखते हैं।"

शुक्रवार, 26 जून 2026

बातें दिल की।

फूलों की माला पिरोते समय धागे के एक सिरे पर गाँठ सी बाँध लेते है फिर दूसरे सिरे से चुन चुन कर फूल पिरो देते हैं । सामने रखे रंग बिरंगे छोटे बड़े फूल पिरोये जाने के बाद एक सुन्दर सी माला बन सज उठते है । 
परंतु अगर दूसरे सिरे की गांठ अगर असावधानी वश खुल जाये तो सारे पिरोये हुए फूल बिखर जाते हैं ।

"बातें करना तुमसे , वो भी लफ़्ज़ों को एक माला में पिरोने जैसा ही तो है पर लफ़्ज़ों की शुरुआत में चाहत की गाँठ तो लगा लिया करो , इसके बगैर सारे लफ्ज़ , जिन्हें न जाने कहाँ कहाँ से चुन चुन कर लाता हूँ , बिखर से जाते हैं ।"

"न बिखरे हुए फूल अच्छे लगते है और न ही लफ्ज़ ।"

होता है , फूलों का बिखेरा जाना और लफ़्ज़ों का बुदबुदाया जाना भी ,मगर मज़ार पर ।

बुधवार, 24 जून 2026

कली।




 "अभी तुम्हारा खिलना शेष है,

अभी तुम्हारा खिलखिलाना शेष है,

अभी तुम्हारा महकना शेष है,


सूरज हवा और मिट्टी से प्राण लेते रहो,

अभी तुम्हारा बिखरना शेष है।"

जो शेष है वही विशेष है।


काश।

धूप

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पत्तियों से होकर आती धूप खुश्क सी खुशबू लिए होती है।

पत्ती

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सूखी पत्तियों पर पांव रखते हुए चलने में एहसास होता है कि जीवन के बाद भी पत्तियां पांव की हिफाज़त कंकड़ पत्थर से कर जाती हैं।

फूल

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फूल तो खुशबू बिखेर कर समर्पण करना सिखाते हैं।


"इन तीनों में से कोई एक सा भी हो जाऊँ किसी एक के लिये भी तो जीवन सिद्ध हो जाये।"


मंगलवार, 23 जून 2026

अग्नि दुर्घटना।

 चलती कार में लगी आग। दरवाजों का लॉक सिस्टम हुआ फेल। लोग भीतर ही दम घुटने से मृत पाए गए।

बिल्डिंग में लगी आग। अंदर के डोर सारे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से काम करते थे। कहीं फेस रिकग्निशन से और कहीं थंब इम्प्रैशन से डोर खुलते थे। आग लगने से बिजली बंद हो गई और सारे डोर बन्द ही रहे , खुल नही सके। दम घुटने से लोगों की मृत्यु हुई।

मूर्ख लोगों इस जमाने मे भी इतनी दूरदृष्टि न हो कि भाई अगर यह सिस्टम फेल हुआ तो लोग कैसे बाहर निकलेंगे।

इतना भी क्या ऑटोमेशन कि जान की कोई कीमत न रहे।

1.पहले Zen कार में पीछे के दोनों दरवाजे मैन्युअल होते थे। कम से कम एक दरवाजा वो भी ड्राइवर के साथ वाला मैन्युअल होना ही चाहिए।

2. बिल्डिंग के फायर ऑडिट में यह ensure किया जाना चाहिये कि पावर फेलियर की स्थिति में सारे ऑटोमेटिक सिस्टम कैसे behave करेंगे। एग्जिट करने वाले दरवाजे मैन्युअल होने चाहिए।

3. बैंक के दरवाजे कभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से क्रियाशील नही रखे जाते। अब बैंक से इम्पोर्टेन्ट तो कोई और बिल्डिंग नही हो सकती।

4. फायर ड्रिल प्रत्येक माह अवश्य होना चाहिये।

5. कोचिंग सेंटर में हर क्लास के पहले दो मिनट का डिसास्टर मैनेजमेंट के लिए ऑडियो चलाना चाहिए जैसे फ्लाइट में अनिवार्यतः सेफ्टी measures बताए जाते हैं।

6. किसी भी परिसर में बड़ी बड़ी होर्डिंग्स, पोस्टर्स लगे होने चाहिए कि आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का क्या तरीका होगा।

7.पेरेंट्स किसी भी स्कूल, कोचिंग में यह सवाल जरूर पूछें कि किसी भी disaster को हैंडल करने के वहां क्या उपाय हैं।

8. Unsafe जगहों के बारे में माउथ पब्लिसिटी अवश्य करें।

9. पहला अंदेशा यही होता कि बिजली शॉर्ट सर्किट से लगी होगी और अब बिजली वाले जिम्मेदार हुए। जबकि बिजली वालों का काम बस मीटर तक बिजली देना होता उसके आगे से कोई मतलब नही। फिर भी कार्यवाई हो जाती उनके खिलाफ और बाद में सफाई देते रहते बेचारे।

10. फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी (यह बिजली विभाग से अलग विभाग होता है ), यह दो विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। अगर बिल्डिंग के मानकों में कोई कमी है तब Developent authority या housing board जिम्मेदार होता है।

ऐसी घातक और दुःखद रिपीट न हों इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। एक दूसरे के ऊपर जिम्मेदारी खिसकाने से कोई समाधान नही निकल सकता।