शनिवार, 4 अप्रैल 2026

चंद्रमा और रात।

रात कितनी चुपके से आती है। कभी कभी तो मुझसे पहले से आकर कोने में बैठी मिलती है। वक्त का हिसाब रखना शायद रात को नही आता। किसी की दो पल में कट जाती है और किसी की एक रात ज़िन्दगी भर नही बीत पाती।

अगर चन्द्रमा के पटल पर दो सुइयां भी होती जो वक्त बताती रहती तो  फिर रात को वक्त बिताने के लिए खुले आसमान में एक घड़ी का सहारा मिल जाता।

"घड़ी पास हो तो वक्त अपना सा लगता है।"

सवेरा।

सवेरा रोज़ कितनी चुपके से आता है , फिर भी नींद खुल जाती है । 

तुम्हारी बातें भी तो ऐसे ही मुझ तक पहुँच जाती है चुपके से जबकि तुम कुछ बोलते ही नहीं । 

देखो फिर चिड़िया चहचहा रही हैं , यक़ीनन तुम आँखे खोल बरबस एक बार मुस्कुराये हो अभी ।

यह लालिमा सुबह की है या फिर एक बार ओढ़ ली है तुमने चादर लाज की ।

मोड़

साथ चलते चलते अक्सर किसी मोड़ पर ही लोग साथ छोड़ते हैं। मोड़ पर पीछे मुड़ कर देखने पर वह दिखता जो नही है। सीधे रास्तों पर अलग हुए तो बहुत दूर तलक तक वो दिखता रहता है और फिर मुंह मोड़ना आसान नही होता है शायद।


राहें बदलनी हो, बस मोड़ आने दो,

मुड़ कर न देखो, उन्हें बस दूर जाने दो।


#मोड़ज़िन्दगीके

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

प्यार

बिना बात के 

बात नहीं करना चाहिए , 

प्यार हो जाता है । 

अनुशासन

 गुस्सा स्वयं को अनुशासित करता है। 

प्यार अनुशासन में रियायत की गुहार करता है। 

अनुशासन प्यार को कच्ची मौत देता है।


मैं अनुशासन तोड़ना चाहता हूँ।

पुल

 पुल इतना सहज हो कि 

सड़क सा लगने लगे तब नदी हाशिये पर चली जाती है।


"मोहब्बत जब इतनी सादगी से हो कि 

विसाले यार की तलब न हो तब दुनिया हाशिये पर चली जाती है।"

गुरुवार, 26 मार्च 2026

रात कोई एक

 कुछ सवेरे , कुछ शाम ,कुछ रातें संजोने लायक होती हैं । इन्हें यूं ही नहीं खर्च कर देना चाहिए । इनके कुछ टुकडों के सहारे पूरी ज़िन्दगी बिताई जा सकती है । कभी कभी रात भी रात भर इसलिए जागती है कि कहीं ऐसा न हो कि सवेरा हो जाये और रात सोती ही रह जाये । रात के ख्वाब में सुबह की ख्वाहिश कुछ ऐसी ही थी शायद । सवेरे का एक टुकड़ा ऐसा ही है आज और चिड़ियों की चहचहाहट भी मानो यही कह रही ।