रात कितनी चुपके से आती है। कभी कभी तो मुझसे पहले से आकर कोने में बैठी मिलती है। वक्त का हिसाब रखना शायद रात को नही आता। किसी की दो पल में कट जाती है और किसी की एक रात ज़िन्दगी भर नही बीत पाती।
अगर चन्द्रमा के पटल पर दो सुइयां भी होती जो वक्त बताती रहती तो फिर रात को वक्त बिताने के लिए खुले आसमान में एक घड़ी का सहारा मिल जाता।
"घड़ी पास हो तो वक्त अपना सा लगता है।"
