मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

ब्लॉटिंग पेपर

 एक सोख्ता कागज होता था पहले, ब्लॉटिंग् पेपर, रुमाल जैसा एक कागज़, परीक्षाओं में भी दिया जाता था मुफ्त। तब स्याही वाली पेन चलती थी अगर स्याही लीक कर जाए या गिर जाए तो उसी सोख्ता कागज़ से उस स्याही को सोख लेते थे।


उस सोख्ता कागज पर अगर स्याही वाली पेन की निब हल्के से टच कराते थे तो स्याही की एक बूंद उस पर बन जाती थी ,फिर वह बूंद धीरे धीरे चारों ओर वृत्ताकार शेप में फैलने लगती थी। उस वृत्त की न कोई सीमा न कोई परिधि न कोई अंत होता था।


"प्रेम की भी अगर कोई एक बूंद  हृदय को छू जाए तो वह भी  ऐसे ही चारों ओर विस्तृत होने लगता है,फिर  प्रेम की न कोई परिधि न उस विस्तार का कोई अंत। परंतु  हृदय  भी तब सोख्ता कागज जैसा ही होना चाहिए ,जिसमे सब कुछ सोख लेने का गुण हो।"



बसन्त पंचमी

 विद्या माँ की कसम

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बचपन मे ,या लगभग जब तक पढ़ाई की ,यहां तक कि इंजीनियरिंग कॉलेज तक ,जब कोई कागज,कॉपी,किताब जमीन पर गिर जाती थी तो उसे तुरंत उठा कर चूम कर माथे से लगा कर मेज पर रख लेते थे। यह स्वभावतः अपने आप बिना कुछ सोचे और तत्काल हो जाता था।


बातचीत में अक्सर किसी बात पर जोर देने या अपनी बात का विश्वास दिलाने के लिए जब भी कसम खाई ,विद्या माँ की ही कसम खाई।


विद्या माँ के प्रति सम्मान और उनके अपमान से उपजे कोप से भय का प्रतीक  होता था ,यह कसम खाना और कॉपी किताब को चूमना। 😊


विद्या माँ की जय।



शेषफल प्रमेय

 समोसे खाओ तो चटनी बच जाती है,मूंगफली खाओ तो नमक बचा रह जाता है। डोसा , इडली खाओ तो साम्भर बचा रह जाता है। पिज़ा खाओ तो पिचकू  से सैशे में  सॉस बची रह जाती है।


सोकर उठो तो ख्वाब शेष रह जाते हैं, मंज़िल तक पहुँचों तो रास्ते शेष रह जाते हैं, निगाहें मिल जायें तो बातें शेष  रह जाती है।


"जो शेष रह जाता है वही शाश्वत है।"

शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

चुम्बन दिवस


 रेखा जब वृत्त को चूमती है तब स्पर्श रेखा कहलाती है। जब और भीतर उतरती है वृत्त के ,तो ज्या कहलाती है और जब यही रेखा केंद्र से होकर गुजरती है तो व्यास बन वृत्त को दो हिस्सों में विभाजित कर देती है।


चुम्बन जब तक स्पर्शरत होता है दोनो का अस्तित्व बना रहता है। ज्यों ज्यों स्पर्श प्रगाढ़ होता जाता है , सीमा लांघते लांघते अन्ततः फिर  वृत्त के दो हिस्से हो जाते है, एक जिसे चूमा गया हो और दूसरा जो इस चुम्बन से परे रह गया हो।


"स्पर्श रेखा अगर वृत्त का आलिंगन करते हुये वृत्त की परिधि सी ही हो जाये तो वह चुम्बन सर्वश्रेष्ठ होता है, इसमे दोनो का वजूद परस्पर विभाजित नही होता।"


#किस #डे

सोमवार, 14 सितंबर 2020

हिन्दी दिवस पर एक प्रेम पत्र।

तुम्हारे स्पर्श में 'स्वर' है और निगाहों में 'व्यंजन'। तुम पास होती हो तो मैं भाषित होता हूँ।

तुमसे ही अलंकृत होते है यह स्वर और यह व्यंजन।रस छंद अलंकार पढ लूँ या तुम्हारा सानिध्य पा लूँ ,एक ही बात है।

अपलक देखती हो जब गद्य रचित हो जाता है और पलकें तितली बनती है जब तब काव्य बह निकलता है।

सोचता हूँ ,मैं शिरोरेखा हो जाऊं और तुम उस पर झूलती एक शीर्षक मेरे जीवन का।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

अलसाई सुबह

 सुस्त सी सुबह

ठहरा सा मौसम


अलसाई चादर

औंधी तकिया


घड़ी की टिक टिक

आंखों में चुभती सुई


अदरक में डूबी चाय

सहमा सिमटा अखबार


मन मौसम मिज़ाज

कुछ यूँ है आज।



मंगलवार, 8 सितंबर 2020

बदलते फ़लक

 बुलबुल रोज़ कहाँ गाती

शजर की नरम छांव मे


वसन्त नही ठहरता

सदा के लिए


फूल खिलने के मौसम

होते है कभी कभी


उल्लास का आलिंगन

यूँ फिर कहाँ


दोस्ती कब ठहरी है

ताउम्र


इतना गर नही जानता

फिर वो ज़िन्दगी कहाँ जानता।