बुधवार, 3 जून 2026

पीरियॉडिक टेबल।


कोई भी विषय कठिन नही होता है। अगर शिक्षक को अपना विषय एकदम स्पष्ट है तब वह बच्चों को कठिन से कठिन विषय को सरल रूपांतर कर समझा सकता है।

पीरियाडिक टेबल को केमिस्ट्री से न जोड़ कर उसे एक मैथमेटिकल मॉडल की तरह बताया जाना चाहिए कि उसका विन्यास या अरेंजमेंट इस तरह से किया गया है कि सभी तत्वों को उनकी मात्र स्थिति से ही उनके गुणधर्म को जाना जा सकता है।

यह तो एक बहुत अच्छे तरीके से प्रेडिक्शन मॉडल भी होता है। दुर्भाग्य यह है कि परीक्षा में ऐसे प्रश्न पूछे जाते तो रटने पर जोर देते है। अब सब तत्वों के एटॉमिक मास और नंबर कौन याद कर सकता है। किस कॉलम और ग्रुप के क्या गुण हैं यह पता रहना चाहिए।

मनुष्य को बारह राशियों में बांट कर उनका भविष्य हम जानने की बात करते है, पीरियाडिक टेबल तो तथ्य आधारित सिद्धांत पर बनाई गई है।

पीरियाडिक टेबल  किसी क्लिष्ट व्यवस्था को एक सरल व्यवस्था में arrange किया गया है।

बच्चों को अपने दोस्तों की आदतों व्यवहार के आधार पर इस तरह की टेबल बनाने का प्रोजेक्ट दिया जा सकता है। किसी भी विषय को अपने आसपास की बातों से simulate कर पढ़ाये जाने का कांसेप्ट devlope किया जाना चाहिए।

रिलेटिविटी जैसे कठिन विषय को भी छोटे से बच्चे को सरल उदाहरण से समझाया जा सकता है।

किसी विषय / पाठ को पढ़ाने के बाद शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चों से प्रश्नपत्र तैयार करने को कहें और फिर स्वयं उनका उत्तर दें।

पाठ्यक्रम बदलने से पहले विवेचना होनी चाहिए कि विषय अप्रासंगिक है, कठिन है या शिक्षण व्यवस्था में दोष है।

मंगलवार, 2 जून 2026

गद्य और पद्य।

रेलगाड़ी घुमावों पर बहुत लुभाती है। सीधी चलती रहने पर सभी डिब्बों को एक दूसरे के आगे पीछे होने का भ्रम होता है पर घुमावों पर गोल हो कर मुड़ते समय इंजन भी सबसे पिछले डिब्बे को देख पाता है और पुलकित होता है।

गद्य और कविता में बस इतना ही अंतर होता है। गद्य में भाव आगे पीछे कतार में होते हैं जबकि कविता में लोच होने के कारण अंतिम पंक्ति भी पहली पंक्ति से जुड़ाव रखती है।

कविता हृदय से उपजती है और गद्य मस्तिष्क से। इसीलिये कविताएं लिखते समय बस शब्द रिस जाते हैं और हृदय हल्का हो उठता है।

"घुमाव पर ज़िन्दगी"

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कसूर तो बहुत किये,

ज़िन्दगी में मगर,

सज़ा वहाँ मिली,

जहाँ बेकसूर थे,

जलाए चराग हमने,

अंधेरों में अक्सर,

मुस्कुराए वो मगर तब,

जब हम बेनूर थे।

गुरुवार, 7 मई 2026

बातें शहद सी।

केचप की बॉटल हो या शहद का जार हो उससे सॉस या शहद उड़ेलने के बाद उसके मुँह के कगार पर जो सॉस या शहद लगी रह जाती है उसे प्रायः अंगुली से लपेट कर उसे चूमते हुये उस पर लगी सॉस या शहद हम चट कर जाते हैं।

आज उनके मुँह से शहद सी बातें निकल रही थीं। मन तो किया कि हथेली से ढक्कन बन्द कर दें और.......😊

मंगलवार, 5 मई 2026

पूँछ।

ऐसा बताया जाता है कि पहले मनुष्यों के पूँछ होती थी , निष्प्रयोज्य होने के कारण धीरे धीरे लुप्त हो गई।

यह बात ध्यान में आते ही मुझे आभास हुआ कि मेरे भी पूँछ है और वो मुझे कहीं चुभ रही है। टटोल कर देखा तो एसी का रिमोट सोफे और मेरे बीच टोल प्लाजा के बैरियर की तरह अड़ा पड़ा था।

कल्पना और आगे बढ़ी और उस लोक में मुझे ले गई जिसे हम पूँछ लोक कह सकते हैं।

ड्राइंग रूम में गेस्ट बैठे है बच्चे बार बार उधर से ही निकल रहे हैं। मैं बच्चों को बता रहा हूँ, देखो ध्यान से दौड़ो ,कहीं अंकल की पूँछ पर पैर न पड़ जाए और देखो आंटी की नई नई शैम्पू की हुई पूँछ है उठा कर उसके नीचे से निकलो।

स्कूल जाते समय मम्मी लोग स्कूली रिक्शे वाले को डांट रही होती , कितनी बार कहा रिक्शा चलाते समय अपनी पूंछ से बच्चों को डिस्टर्ब न किया करो ,उन्हें गुदगुदी लगती है।

ड्रेस खरीदते समय दुकानदार बताता , साहब पैंट के साथ यह पूँछ कवर एकदम फ्री है और कंट्रास्ट में बहुत अच्छा लगेगा।

सोते समय मियां बीबी में लड़ाई होती , अपनी पूँछ इधर मत रखो अपने ऊपर ही रखो, नही तो अभी उमेठ दूंगी।

मोहल्ले के बच्चे लड़ते लड़ते अपनी पूँछ आपस मे उलझा लेते फिर उनके पापा मम्मी लड़ते लड़ते उसे सुलझाते।

लोग एक दूसरे को पीछे से ही पूँछ के आकार प्रकार से पहचान लेते।

शादी के समय वर वधू की पूँछ को आपस मे गांठ बांध कर फेरे लगवाते।

पूँछ का शैम्पू तेल परफ्यूम अलग से मिलता।

लेटेस्ट : पूँछ पर लोग टैटू भी बनवा लेते तरह तरह के।

काश कि पूँछ फिर से उग आये।



बुधवार, 29 अप्रैल 2026

चाय

चाय ऑफर करने के पीछे मकसद 

कुछ समय साथ बैठने का होता है , 

चाय पिलाने का नहीं ।

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

नियति / प्रारब्ध / भाग्य

"नियति व्यापकता लिए हुए है। नियति संसार की होती है ,इसे ही  प्रकृति की चाल कहते हैं।"

"प्रारब्ध आपके हिस्से की नियति है।"

"भाग्य आप अपने कर्म से बनाते है। कर्मफल को रेट्रोस्पेक्ट में देखते है तो भाग्य कहलाता है।"

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

बोन्साई

बीती रात एक समूची नींद नहीं थी,अक्सर ऐसा होता है अब।

छोटे छोटे से टुकड़ों में अलग अलग बनती बिगड़ती रहती है।हर एक छोटी सी नींद के टुकड़े में बड़े बड़े ख्वाब उगते रहते हैं।

तुम्हे बोनसाई से बहुत प्यार है न। बरगद ,पीपल जैसे वृक्ष छोटे छोटे से गमलो में।

ख्वाबों के भी बोनसाई बना लिए है अब मैंने , छोटी छोटी सी नींद के गमलों में।

यह ख्वाब पास से छू कर देखना ,पसंद आएंगे तुम्हे।