आज तुम्हारा जन्मदिन है | क्या तोहफा दूँ ? तोहफे को कोई क्या तोहफा देगा | तुम तो खुद ही मेरे लिए तोहफा बन मेरी जिंदगी में आ गईं और 'better half' से कितनी जल्दी 'butter half' बन गईं, पता ही नहीं चला | ईश्वर ,तुम्हे सदा हँसता हंसाता रखे ,क्योंकि तुम्हे पता है, मैंने कई बार यह कहा है कि, हँसते हुए तुम बहुत खूबसूरत लगती हो | बस हमेशा खिलखिलाती रहो | मेरे साथ आज तुम्हारा २३ वां जन्मदिन है |
जन्मदिन की शाम को बच्चे बड़ी उत्सुकता से देखते हैं उन्हें क्या तोहफा मिला ,कौन आया कौन गया | उसी तरह आज मै तुम्हारे जन्म दिन पर सोच रहा हूँ कि इतने बीते दिनों में, मै तुम्हे कितनी खुशियाँ दे पाया और तुम्हारी ज़िन्दगी में कितने लोगों को जोड़ पाया और
कितने ना जाने किन कारणों से छूटते गए | जन्म दिन मनाने की परंपरा का शायद यही कारण होगा कि उस दिन उस व्यक्ति के जीवन को महत्वपूर्ण बना कर उसके होने और उसके ना होने का अर्थ समझा जाए | जीवन को जीने के प्रति या दुनियादारी के सम्बन्ध में हम तुम एक राय बहुत कम ही रहे, पर पल भर के लिए भी तुम आँखों से ओझल होती हो तो जीना दुश्वार हो जाता है ,हम सभी का | बच्चे बड़े हो रहे थे ,उन के साथ हम भी बड़े हो रहे थे ,अब वे दोनों हॉस्टल
(I I T-K) में चले गए,हम फिर वापस अपने शुरूआती दिनों में आ गए | इसे यूँ समझो कि बच्चे गर्भ में दो बार आते हैं ,पहली बार माँ के गर्भ में जब बढ़ते हैं तब माँ का भी पेट बच्चे के बढ़ने के साथ बड़ा होता जाता है ,बच्चे के जन्म के बाद माँ का पेट पुनः वापस छोटा हो जाता है | उसी तरह बच्चा फिर जन्म के बाद परिवार के गर्भ में आता है और विकसित होता रहता है ,जिसके विकास के साथ माँ-बाप भी अपने को बड़ा होता महसूस करते रहते हैं | फिर जब बच्चा परिवार से बाहर चला जाता है ,पुनः माँ-बाप वापस शुरूआती ज़िन्दगी के दौर में आ जाते हैं | शायद यही कारण है कि मै अभी भी कभी कभी बचपना कर जाता हूँ और तुम कह उठती हो "अब तो बड़े बन जाइए "|
मेरी कमी शायद यह रही कि, मै बहुत vocal नहीं रहा या यह कहो कि मुझे यह सब आपस में flirt करना जैसा लगता था ,पर इसका खामियाजा यह रहा कि मेरे दिल की बात हमेशा मेरे दिल में ही रह गई और तुम इसे कमी मान अपने में सिमटी रहीं |
कभी कभी लगता है, जीवन एक उस पज़ल जैसा है ,जिसमें अंग्रेजी के अक्षर या अंक बेतरतीब से होते हैं ,जो एक दूसरे के ऊपर खिसका खिसका कर चलाये जाते है और उन्हें सही क्रम में लगाना होता है | उसमे उन अक्षरों या अंकों को चलाने के लिए एक खाना खाली होता है ,अगर वह एक खाली खाना ना हो तो उस पज़ल को हल करना नामुमकिन होता | उसी तरह ज़िन्दगी में "कमी" का एक खाना खाली होता है, उसी space को अन्य चीज़ों यथा 'रिश्ते','नाते', 'धन दौलत' इत्यादि से लोग भरते रहते हैं ,फिर भी "कमी" वाले space को बनाए रखना होता है ,तभी जीवन की पज़ल को हल कर सकते हैं | शायद इसी लिए सब कुछ होते हुए भी तुम कुछ रिक्तता महसूस करती हो ,पर मै नहीं करता, क्योंकि वह रिक्तता अत्यंत आवश्यक है ,जीवन को चलाने के लिए |
तुम सदा रिक्तता को पूर्णता से भरती रहो ,बस ईश्वर से यही प्रार्थना है | "जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाये |"