नींद खुल गई अचानक जब लगा कि किसी ने खिड़की थपथपाई हो आहिस्ते से। हल्के से दरार सी बनाते हुए पल्लों के बीच से झांका तो पीली पीली स्ट्रीट लाइट अंदर लुढ़कती हुई आ गिरी। लगा जैसे चाँद खिड़की से गुलेल पर रोशनी चढ़ा कर अंदर निशाना साध रहा हो।
पीली रोशनी में चाँद घुला घुला सा लगता है। अब पूरी खिड़की खोल दी मैंने और स्ट्रीट लाइट का पीला बल्ब निहार रहा हूँ ,लग रहा है जैसे चाँद उलझ गया हो बिजली के तारों में और कसमसा सा रहा है इन तारों के बीच।
मेरे आगोश में भी जब कभी चाँद कसमसाता है तो रोशनी कुछ यूँ ही पीली हो जाती है।
©अमित

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