मंगलवार, 30 जून 2026

ज़िंदगी

ज़िन्दगी को अपनी ओर खींचते खींचते हाथ कब सद्दी से मांझे पर आ गया ,पता ही नही चला और अंगुलियां लहूलुहान हो गईं।

"कुछ लम्हे मांझे सरीखे होते हैं , जो कत्ल भी करने का माद्दा रखते हैं।"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें