चलती कार में लगी आग। दरवाजों का लॉक सिस्टम हुआ फेल। लोग भीतर ही दम घुटने से मृत पाए गए।
बिल्डिंग में लगी आग। अंदर के डोर सारे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से काम करते थे। कहीं फेस रिकग्निशन से और कहीं थंब इम्प्रैशन से डोर खुलते थे। आग लगने से बिजली बंद हो गई और सारे डोर बन्द ही रहे , खुल नही सके। दम घुटने से लोगों की मृत्यु हुई।
मूर्ख लोगों इस जमाने मे भी इतनी दूरदृष्टि न हो कि भाई अगर यह सिस्टम फेल हुआ तो लोग कैसे बाहर निकलेंगे।
इतना भी क्या ऑटोमेशन कि जान की कोई कीमत न रहे।
1.पहले Zen कार में पीछे के दोनों दरवाजे मैन्युअल होते थे। कम से कम एक दरवाजा वो भी ड्राइवर के साथ वाला मैन्युअल होना ही चाहिए।
2. बिल्डिंग के फायर ऑडिट में यह ensure किया जाना चाहिये कि पावर फेलियर की स्थिति में सारे ऑटोमेटिक सिस्टम कैसे behave करेंगे। एग्जिट करने वाले दरवाजे मैन्युअल होने चाहिए।
3. बैंक के दरवाजे कभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से क्रियाशील नही रखे जाते। अब बैंक से इम्पोर्टेन्ट तो कोई और बिल्डिंग नही हो सकती।
4. फायर ड्रिल प्रत्येक माह अवश्य होना चाहिये।
5. कोचिंग सेंटर में हर क्लास के पहले दो मिनट का डिसास्टर मैनेजमेंट के लिए ऑडियो चलाना चाहिए जैसे फ्लाइट में अनिवार्यतः सेफ्टी measures बताए जाते हैं।
6. किसी भी परिसर में बड़ी बड़ी होर्डिंग्स, पोस्टर्स लगे होने चाहिए कि आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का क्या तरीका होगा।
7.पेरेंट्स किसी भी स्कूल, कोचिंग में यह सवाल जरूर पूछें कि किसी भी disaster को हैंडल करने के वहां क्या उपाय हैं।
8. Unsafe जगहों के बारे में माउथ पब्लिसिटी अवश्य करें।
9. पहला अंदेशा यही होता कि बिजली शॉर्ट सर्किट से लगी होगी और अब बिजली वाले जिम्मेदार हुए। जबकि बिजली वालों का काम बस मीटर तक बिजली देना होता उसके आगे से कोई मतलब नही। फिर भी कार्यवाई हो जाती उनके खिलाफ और बाद में सफाई देते रहते बेचारे।
10. फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी (यह बिजली विभाग से अलग विभाग होता है ), यह दो विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। अगर बिल्डिंग के मानकों में कोई कमी है तब Developent authority या housing board जिम्मेदार होता है।
ऐसी घातक और दुःखद रिपीट न हों इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। एक दूसरे के ऊपर जिम्मेदारी खिसकाने से कोई समाधान नही निकल सकता।

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