अभिषेक / रमन ,
जन्मदिन पर क्या कहें बस खिलते रहो , खिलखिलाते रहो । शिक्षा / नौकरी के विषय में अब तो कुछ कहना शेष नहीं , उन दोनों क्षेत्रों में तुमने अपने साथ साथ हम लोगों का भी मान बढ़ाया ही है पर कुछ ज्ञान तो देना पड़ेगा न ,नहीं तो पापा कैसे कहलाऊंगा ।
१. शारीरिक स्वस्थता और मानसिक दृढ़ता शीर्ष वरीयता पर होने चाहिए ।
२. हर अगला दिन पिछले दिन से भिन्न अर्थात कुछ तो नया होना चाहिए ।
३. जिस किसी के संपर्क में आओ उस पर तुम्हारे व्यक्तित्व का अधिक नहीं तो तनिक सा तो प्रभाव दिखना चाहिए ।
४. जितना संभव हो समाज / देश की बेहतरी / तरक्की के लिए निरंतर प्रयास होना चाहिए । परिवार के लिए तो हर कोई करता है । सोच परिवार से ऊपर की हो ।
५. किसी भी निर्णय के दूरगामी परिणाम की व्याख्या समग्रता में बहुत आवश्यक है , वह निर्णय चाहे परिवार के सन्दर्भ में हों या समाज / देश के सम्बन्ध में हों ।
६. हासिल सब कुछ करो पर ,अपना कुछ भी मत समझो ।
७. तुम्हारी किसी भी बात अथवा कृत्य से कभी किसी के आत्मसम्मान को ठेस नहीं लगनी चाहिए ।
८. समाज में आर्थिक और शैक्षिक विषमताएं बहुत हैं । समाज के निम्नतम स्तर के लोगों की भी बेहतरी के विषय में यथासंभव सोच हो और प्रयास भी ।
९. कितनी भी उन्नति कर जाओ पर सामाजिक मर्यादाओं का भान रहे ।
१०. जीवन में सफलताओं / विफलताओं का क्रम अवश्य आता है । उनसे न कभी निराश हो और न कभी आपा खो दो ।
और अंत में सिर्फ और सिर्फ एक बात , तुम्हारी मम्मी को तुमसे अब क्या चाहिए पता है ,तुम्हे ? सिर्फ रोज़ दो मिनट की बात फोन पर ,कितने भी बिज़ी हो, कितनी भी अन्य प्राथमिकताएं हों , देश में हो या रहो विदेश में ,बस एक बार तुम लोगों की आवाज़ सुन लेती हैं तो उनका दिन पूरा हो जाता है और तुमसे बात होने पर तुम्हारी मम्मी के चेहरे पर जो संतोष और ख़ुशी झलकती है न ,उससे मेरा दिन पूरा हो जाता है ।
अब एक चॉकलेट खा लेना ,इतनी कड़वी दवा के बाद कुछ मीठा हो जाये ।
( जन्मदिन तो तुम्हारा है पर यह बातें तुम्हारे दद्दा ( अनिमेष / राजन ) के लिए भी हैं )