गुरुवार, 23 जुलाई 2026

मोहब्बत।

ख़ुदा खुद को हम भी न समझ बैठें,
इतनी जल्दी भी मोहब्बत तुम कुबूल न कर लेना।

ये माना कि तपिश है कुछ उधर भी,
दस्तूर मोहब्बत के भी आसां कहाँ होते।

©अमित

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