सोमवार, 23 जनवरी 2012

" आंसू हम पीते रहे, वो खिलखिलाते रहे...."


वो महका किये,
हम बहका किये,
वो संवरते रहे,
हम देखा किये,
वादा वो करते गए,
हम निभाया किये,
गुनाह वो करते रहे,
सज़ा हम पाते रहे,
हम चुप ही रहे,
वो चहका किये,
आंसू हम पीते रहे,
वो खिलखिलाते रहे,
हम दुआ करते रहे,
वो सलामत रहें ,
फिर भी हमको वो,
बद-दुआ समझा किये,
खुश रहें वो अपनी दुनिया में सदा,
हम बस यही दुआ करते चले |

20 टिप्‍पणियां:

  1. खुश रहें वो अपनी दुनिया में सदा,
    हम बस यही दुआ करते चले |

    वाह ...बहुत खूब

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  2. बहुत बहुत सुन्दर...
    हम दुआ करते रहे,
    दुआ उनको लगती रही,...इससे अगर यूँ कहा जाये तो..???अन्यथा ना लें...
    हम दुआ करते रहे,
    वो सलामत रहे...

    आपका कविता कहने का अंदाज़ बहुत पसंद आया..
    सादर.

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  3. दुआ करते रहे, इसलिए तो वो खुश हैं... सुन्दर भाव

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  4. खिलखिलाना तो उनका रहा बेवजह,
    क्या कहें प्यार अपना तो बढ़ता गया।

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  5. वाह बहुत खूब

    उनके सदके में सब मंज़ूर हैं ....

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  6. गुनाह वो करते रहे,
    सज़ा हम पाते रहे,

    बहुत खूब...वाह

    नीरज

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  7. यही तो दुनिया का चलन है- इक हसता है तो सौ रोते हैं।

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  8. सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....

    जय हिंद...वंदे मातरम्।

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  9. bahut sundar ..pyar se bharpoor rachna "wo mehka kiye ..hum behka kiye " bahut hi khoobsurat aagaj hai rachna ka ..man moh liya aapki is pyari si rachna ne :-) badhai

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