यह बात तो पूरी तरह सच है कि, आरक्षण की सुविधा दिए जाने से ही आज समाज में आरक्षित वर्ग के लोगों ने जो स्थान और स्थिति प्राप्त की है ,यदि 'आरक्षण' ना होता तब वे कभी भी इतनी उन्नति और सम्मान ना हासिल कर पाते | समाज में विसंगति और अ-मनुष्यता समाप्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक था और तभी हम सब आज मनुष्यता की सोच के प्रति इतना परिवर्तनशील और प्रगति परक हो पाए हैं |
आरक्षण का उद्देश्य मूलतः वंचित और अभाव ग्रस्त लोगों को मुख्य धारा में लाकर विकसित करने का था और जो कि एक स्वस्थ समाज के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक भी है |
परन्तु आज स्थिति थोड़ी भिन्न हो चली है |आरक्षण प्राप्त परिवार के लोग इस सुविधा के कारण लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं, और चूँकि इस सुविधा का प्रतिशत अथवा अनुपात तो निश्चित है, अतः सही मायने में जिन्हें सुविधा मिलनी चाहिए ,वे वंचित रह जा रहे हैं | यह कैसे तर्क संगत हो सकता है कि आरक्षित वर्ग के एक सरकारी अफसर के बेटे को पुनः आरक्षण का लाभ मिल जाता है और अत्यंत गरीब और वंचित व्यक्ति इस लाभ का लाभ नहीं ले पाता, क्योंकि आरक्षित वर्ग के छात्र को अब अपने ही वर्ग के अत्यंत समृद्ध छात्र से ही प्रतिस्पर्धा करनी होती है,जिसमें वह निश्चित तौर पर असफल हो जाता है|
सामान्य वर्ग के लोगों में भी रोष तभी होता है, जब कोई प्रतियोगिता ,नौकरी अथवा अवसर आरक्षित वर्ग के उस व्यक्ति को मिलता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से सामान्य वर्ग के व्यक्ति से बेहतर होता है | इस व्यवस्था से एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती जा रही है जिससे आरक्षण नीति अपने मिशन से इतर हो रही है,और समाज को पुनः अ-मनुष्यता जैसे भाव उत्पन्न करने की ओर ले जा रही है | इसके लिए आरक्षित वर्ग के लोगों को ही आगे आना होगा और इस व्यवस्था से समाज में उत्पन्न होने वाली स्थिति पर गंभीरता से विचार करना होगा |
इसका एक और केवल एक समाधान यह हो सकता है कि आरक्षित वर्ग के लोगों को यह सुविधा एक वंश में केवल एक बार मिले ( only one time reservation in one generation)|
आरक्षण इस प्रकार से लागू किये जाने पर यह सुविधा पूर्ववत उन सभी लोगों को मिलती रहेगी जो सही मायने में समाज में अभी भी मुख्य धारा से विलग है, और अपने ही बंधुओं से compete नहीं कर पा रहे हैं | यह बात भी सच है की आरक्षण प्राप्त बच्चे भी अत्यंत प्रतिभाशाली होते हैं और प्रायः तमाम अवसरों पर वे सामान्य वर्ग के बच्चों से काफी बेहतर प्रदर्शन भी करते हैं ,ऐसी स्थिति में वे स्वयं भी आरक्षण प्राप्त होने के कारण अलग थलग महसूस करते हैं | व्यवस्थाएं ऐसी हों और उनका अनुपालन और क्रियान्वयन इस प्रकार से हो की हम एक उन्नत समाज की और अग्रसर हों सकें ,ना कि राज नेताओं की divide and rule और lolypop policy का शिकार हों |






