शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

लकीरें वक्त की।

तुम्हारा वक्त कुछ अलग सा चलता और हमारा कुछ अलग सा ही रहता। बेचैन तुम भी और सुकून हमे भी नही। 

हाथ मिलाने से लकीरें क्यों नही मिल जाती आपस मे। 

पर दो तरह के वक्त आपस मे घुलते नही शायद। वक्त के भी  बहुत से रंग होते हैं।

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