शनिवार, 30 जून 2012

" जी " क्यों लगाया ............"




जी, कुछ कहना है तुम से | इस पर वे हमेशा की तरह शिकायत और उलाहना भरे अंदाज़ में चहकी , फिर 'जी' लगाया आपने | मैंने कहा , मैं तो कब से 'जी' लगाए बैठा हूँ, पर तुम्हारा "जी है कि मानता नहीं" | क्या मतलब इसका ,उसने पूछा | मैंने कहा, 'जी' का अर्थ दिल होता है , अब जब तुमसे दिल लगा लिया है फिर तो नाम से भी 'जी' लगाना पडेगा न,  और तुम कहती हो कि 'जी' मत लगाइए |

मेरा 'जी' तो तुमसे लग गया है और तुम्हारे नाम से भी, फिर बिना 'जी' लगाये बात कैसे करें | कोई किसी से बिना जी लगाए बात कर भी कैसे सकता है ,और मेरा 'जी' तो तुम्हारी बातें सुनने को ही बेक़रार रहता है । दिल तो करता है कि तुम्हें 'जी सुनो जी' कह कर पुकारा करूं | इसी बहाने मेरे 'जी' के बीच तो रहोगी तुम | खिलखिलाते हुए वे बोली , "जी आप भी एकदम वो हैं जी" |

इतना सुनना था कि मैं 'जी ही जी' में जी उठा | अब तो मुझे उनकी हर अदा हर हरकत में अपना 'जी' नज़र आता है और 'जी ही जी' में मेरा 'जी' उनके 'जी' को अपना मान बैठा है । अब "मेरा जी उनके ही पास है" और उनके सिवाय किसी के साथ मैं 'जी' लगाता भी नहीं ।

"नाम के साथ इसीलिए जी लगाते हैं शायद कि, जिससे स्नेह या प्यार करना हो अथवा सम्मान करना हो उसके साथ जी लगा दो बस । और एक बार जी लग जाए फिर तो ईश्वर भी  मिल जाते हैं  |"

इसे 'जी' का जंजाल भी कह सकते हैं ।



                                                                  
                                                 
                                                  

           

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही शानदार पोस्ट.... इतने कम शब्दों में अफेक्शन को बहुत ही खूबसूरती से डेपिक्ट किया है आपने.. ऑल द सम इन जिस्ट ... आई फेल्ट दी पोस्ट ईज़ वैरी नाईस एंड टची टू.. वैसे तो हम लोग घर में जी लगाने के लिए यूज्ड टू हैं...बट इन पर्सनल रिलेशन .. ईट फील्ज़ द कोज़िनेस एंड द दीप्नेस ऑफ़ लव.. थैंक्स फॉर शेयरिंग..

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  2. बहुत ही शानदार पोस्ट.... इतने कम शब्दों में अफेक्शन को बहुत ही खूबसूरती से डेपिक्ट किया है आपने.. ऑल द सम इन जिस्ट ... आई फेल्ट दी पोस्ट ईज़ वैरी नाईस एंड टची टू.. वैसे तो हम लोग घर में जी लगाने के लिए यूज्ड टू हैं...बट इन पर्सनल रिलेशन .. ईट फील्ज़ द कोज़िनेस एंड द डीप्नेस ऑफ़ लव.. थैंक्स फॉर शेयरिंग..

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  3. आप दो जी कहाँ से लायेंगे, और कहीं वे अपना नाम निकाल कर ले गयीं तो जीजी ही शेष रहेगा..

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  4. वाह जी वाह ...आज पता चला नाम के साथ "जी " क्यों लगाते हैं और एक बार जी लग जाए फिर तो ईश्वर भी मिल जाते हैं...

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  5. जी बहुत ही अच्छी और सच्ची बात कही है ..
    मै भी बात करते समय नाम के साथ जी लगाती हूँ

    "नाम के साथ इसीलिए जी लगाते हैं शायद कि, जिससे स्नेह या प्यार करना हो अथवा सम्मान करना हो उसके साथ जी लगा दो बस । और एक बार जी लग जाए फिर तो ईश्वर भी मिल जाते हैं |"

    और ये बात तो एकदम परफेक्ट है आपकी...
    बहुत शानदार और मजेदार पोस्ट....
    :-)

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  6. 'जी' लगाने का यह अंदाज़ अच्छा लगा

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  7. प्रवीण जी बात में दम है :) खतरा तो है :):).
    मजेदार लिखा है.

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  8. कितने G से भला होगा???? 3G .. 2G ????

    कृपया स्पष्ट करें???
    :-)

    सादर
    अनु

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  9. वाह जी वाह .... क्या बात कही.... मेरी कविता भी यही कुछ कह रही है | ये जी जी का जंजाल ही है |

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  10. जी लग जाने से ईश्वर मिल जाते हैं और खुद का जी मंदिर बन जाता है |
    आपके जी से लिखी पंक्तियां हमारे जी को छू गई |

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