रविवार, 24 जून 2012

" एक ब्लॉगर बोरवेल के अन्दर........"

अभी अभी खबर आई कि गुडगाँव के मनेसर में माही को सेना ने सकुशल बाहर निकाल लिया है | ईश्वर उसे दीर्घायु करें | माही को अस्पताल ले जाया गया |

उसके वहां से जाते ही सारा जमावड़ा वहां से ख़तम हो गया | सारा झाम ताम मीडिया का और वहां की पब्लिक का वहां से ऐसे गायब हो गया जैसे गधे के सर से सींग | वह बोरवेल या कहें वह मौत का गड्ढा अभी भी खुला पड़ा है और निश्चित तौर पर खुला ही पडा रहेगा |

आजकल हिंदी ब्लॉगर कुछ ज्यादा ही खोजी प्रवृत्ति के और समाज सुधारक से हो रहे हैं | ऐसे ही एक ब्लॉगर पहुँच गए उस बोरवेल का जायजा लेने जहां माही गिर गई थी | वह वहां अपने किसी साथी ब्लागर को नहीं ले गए थे, जिससे कि यदि वहां कुछ अनुसंधान में निकलता है तब वह ही उस विषय के आदि ब्लॉगर कहलाये जा सकें | पहले उन्होंने उस गड्ढे के चारों ओर घूम घूम कर उसका मुआइना किया और यूं घूर घूर कर देख रहे थे मानो कह रहे हों, नाहक तुमने चार दिन पूरे देश को उलझाए रखा | सेना को भी परेशान किया और उस नन्ही सी जान को भी तंग किया | 

इस पर गड्ढा भी मुस्कुराता हुआ बोला , क्या बकवास करते हो | अरे !पूरा देश तो गड्ढे में कब का आ चुका है | हां ! सेना और उस बच्ची को यहाँ देख मुझे भी तकलीफ हुई | पर क्या करें | बच्चे वही करते हैं जो बड़े करते हैं | उसने देखा , पूरा का पूरा देश गड्ढे में जा रहा है ,चलो हम भी भीतर जाकर देखें , ऐसा क्या है वहां | बस इसी चक्कर में नन्ही बिटिया यहाँ आ गई | पर देखो ,मैंने उसे अभी तक महफूज़ रखा हैं यहाँ | और एक तुम लोग हो कि लड़कियों को अव्वल तो जन्म ही नहीं लेने देते और अगर वह ईश्वर की कृपा से जी जाए तब बड़ा होने पर हर मोड़ पर किसी ना किसी गड्ढे में डालने की फिराक में रहते हो |

अब तक वह ब्लॉगर महोदय उस गड्ढे की बातें सुन काफी इम्प्रेस्ड हो चुके थे और वह वहीँ से लैपटाप से फेसबुक पर अपना स्टेटस ड़ाल चुके थे 'below the earth' | अभी वह गड्ढे का सूक्ष्म अवलोकन कर ही रहे थे कि अचानक उनका पाँव फिसला और वह उस बोरवेल के भीतर गिर गए | शुरू में गड्ढा थोड़ा बड़ा था , सो वह आराम से फिसलते चले गए | पर ८/१० फीट के बाद गड्ढे का व्यास उनकी कमर के लपेट से कम था सो वह कमर के सहारे ऐसे लटक गए जैसे बचपन में माएँ अपने छोटे से बच्चे को पैर में लटका कर पाटी /शू शू कराती हैं | अब चूँकि यह ऐसे ब्लॉगर हैं जो अक्सर जोखिम उठाते रहते हैं सो हार कहाँ मानने वाले थे | वह वहीं से कोहनी के सहारे अपने को ऊपर लिफ्ट करने की कोशिश करते रहे | पर इस कोशिश में उनके अगल बगल की मिटटी धसकती रही और वह गुरुत्वाकर्षण के नियम का पालन करते हुए नीचे धरती माँ की गोद की ओर अग्रसित होते रहे |

अब तक उनके फेसबुक स्टेटस के माध्यम से लोग जान चुके थे कि कोई महान ब्लॉगर फिर से उसी बोरवेल में गिर गया है | कुछ तो बहुत खुश हुए कि चलो एक ईनामी ब्लागर कम हुआ | अरे हर ईनाम जो झपट ले जाता है | कुछ इसलिए खुश हुए कि अच्छा हुआ ,ये ब्लॉगर दूसरों की चर्चा कर अक्सर उन्हें गड्ढे में गिराता रहता है | आज खुद ही गड्ढे की महादशा को प्राप्त हो गया है | मगर फिर भी उस गड्ढे में गिरे ब्लागर की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि वह वहां से भी बिना भयभीत हुए उस अँधेरे में कविता की रचना किये जा रहा था : अन्धेरा तू इतना निर्मम क्यों , कैसे जानू मर्म तेरा ....|

लेटेस्ट अपडेट यह है कि, उस ब्लॉगर ने उस गड्ढे से बाहर निकलने से मना कर दिया है और ऐलान किया है कि जब सारे लोग  मिलकर अपने देश को गड्ढे से बाहर निकालने का प्रयास करेंगे तभी वह भी बाहर निकलने की कोशिश करेगा नहीं तो तब तक वहीं से चर्चा जारी रहेगी | 

वंदेमातरम ! सत्यमेव जयते !   


छपते छपते :"इस पोस्ट  को पब्लिश करने के बाद पता चला बेचारी नन्ही माही नहीं बच सकी | ईश्वर उसे अपने पास महफूज़ रखें |"

8 टिप्‍पणियां:

  1. ईश्वर माही की आत्मा को शांति प्रदान करे .... ब्लॉगर के माध्यम से तीखा कटाक्ष है ..... या ये कहें कि देश की व्यवस्था पर .... नागरिकों को भी कुछ कर्तव्य निबाहने चाहिए .... घर के आस पास ऐसे गड्ढे हों तो तुरंत सूचना देनी चाहिए .... या जब गड्ढे खोदे जा रहे हों तब भी ध्यान रखना चाहिए ... कि ऐसे गड्ढे खुले न पड़े रहें .... न जाने कितने मासूम बच्चों कि जान ले कर लोग जागरूक होंगे ?

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  2. दुखद, पर देश के बड़े बड़े गढ्ढों का क्या करें..

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  3. बेचारी माही ... बेचारे हम ... बेचारा देश हमारा !

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  4. बहुत दुखद घटना है...
    पर आस पास के नागरिक भी सचेत रहे जब आस पास
    ऐसा कुछ देखे तो उन्हें सूचना देनी चाहिए...

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