बुधवार, 29 जून 2011

"गैस लाइटर" बनाम "माचिस"

               बड़ी साधारण सी बात है कि,लोग गैस के चूल्हे को लाइटर से जलाते हैं और माचिस का प्रयोग लगभग नहीं ही करते हैं | जो कि पूरी तरह से गलत है |
               लाइटर से गैस जलाने के लिए पहले आप गैस को नॉब से खोल लेते हैं ,गैस निकलना शुरू हो जाती है ,फिर आप लाइटर से खट खट करना शुरू करते हैं | आदर्श परिस्थिति में लाइटर को एक ही बार यानी पहली बार में ही स्पार्क दे देना चाहिए ,जिससे गैस तुरंत जल जाये | पर होता क्या है ,अधिकतर लाइटर एक बार में स्पार्क नहीं देता ,आप बार बार खट खट करते हैं | इस बीच  गैस तो निकल ही रही होती है,वह चूल्हे के बर्नर के ऊपर एकत्र होती रहती है | यदि लाइटर तनिक भी देर से स्पार्क देता है ,तब तक काफी अधिक गैस की मात्रा का एक प्रोफाइल  सा बन चुका होता है ,जो स्पार्क मिलने पर आग चारों ओर फैला  सकता  है और काफी घातक हो सकता है ,विशेष कर बच्चे नुकसान उठा सकते हैं | अब देखिये माचिस से जब आप गैस जलाते हैं ,उस स्थिति में पहले आप माचिस की तीली जला लेते हैं ,अब चूँकि बर्नर के मुंह पर आग मौजूद है ,जैसे ही आप गैस खोलते है ,थोड़ी सी भी मात्रा  होने पर  गैस जलना शुरू कर देती है | गैस का एकत्र हो पाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता | दुर्घटना की सम्भावना शून्य हो जाती है | हाँ ,माचिस का व्यय थोडा अवश्य बढ़ जाता है |
                यह सिद्धांत जीवन के अनेक क्षेत्रों में लागू होता है | समस्याओं को एकत्र होने का मौका देकर ,फिर जब हम समाधान का लाइटर जलाते हैं ,तब तक समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी होती है ,और ब्लास्ट हो जाता है | यदि हम ज्यों कोई समस्या आये तुरंत ही उसका समाधान शुरू कर दें, तब इस स्थिति से उबरा जा सकता है ।
               जब कहीं धरना प्रदर्शन ,रैली इत्यादि होती है,शासन का रवैया रहता है कि उसे कोई  तवज्जो मत दो । धीरे धीरे जब भीड़ विशाल रूप ले लेती है,तब प्रशासन का स्पार्क रूपी 'आपरेशन कन्ट्रोल' शुरु होता है और परिणति स्वरूप रामलीला मैदान या भट्टा-परसौल जैसी स्थिति हो जाती है । यदि प्रशासन या पब्लिक डीलिंग विभाग के लोग इस बात को गौर कर जनता के एकत्र होने से पहले ही उनकी समस्याओं के निदान की बात शुरु कर दें ,फ़िर तो  विस्फ़ोटक स्थिति से बचा जा सकता है ।
              रेलवे  की लाइन हो,गैस  की लाइन हो,पासपोर्ट  की हो,कहीं दाखिले की हो ,काउन्टर तब खुलते हैं ,जब भीड़ अनियंत्रित हो चुकी होती है । पहले आदमी के आने से पहले ही यदि काउन्टर खुला मिले ,तब ना कभी भगदड़ होगी ना कभी रोष होगा |
             कैसा भी कार्य हो, या कितना भी कार्य हो ,बस करना शुरू कर दें ,बिना उसका  परिमाण देखे ,समस्त कार्य धीरे धीरे सहजता से स्वयं पूर्ण हो जायेंगे और आपको अत्यंत आनंद की अनुभूति होगी | और यदि आपने कार्य को इकठ्ठा होने दिया फिर तो दिमाग का विस्फोट होना तय ही है |
                            
                                   "कार्य से पहले कर्ता हो ,बस इत्ती सी बात है |"
   
                    

24 टिप्‍पणियां:

  1. मान गये भाई, गज़ब का मौलिक चिन्तन !
    मैं तो पढ़ते ही मुरीद हुआ !

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  2. कसम से मान गये सरकार, बडी पते की बात कही।

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  3. ek taraf kavi man aur ek taraf maulik chintan.....kya baat hai Sir!.........kabil-e-taareef.

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  4. काश प्रशासन की सोच भी आपकी तरह हो जाती

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  5. ऐसी विस्फोटक स्थितियां भी योजनात्मक ढंग से सरकारें ही पैदा करती है..... करवाती हैं.... सार्थक चिंतन

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  6. गैस निकलते ही स्पार्क जले, सामाजिक दर्शन भरी पोस्ट।

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  7. गैस लाईटर से शुरू होकर विचारों की श्रृंखला प्रशासन की लापरवाही तक जा पहुंची ...
    काश प्रशासन समझ पाए !

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  8. सुन्दर समन्वय और तारतम्य .यही तो टूटा हुआहै सामाजिक राजनीतिक और दफ्तरी जीवन का .चीज़ों के प्रति टालू रवैया ,डिनायल के मूड में रहना ,पलायन करते रहना समस्याओं से जीवन से जगत से बे -दिली लगाव -हीनता का प्रतीक है .यही इस दौर की सौगात है .हमारे वक्त की धड़कन है .

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  9. बहुत उपयोगी सलाह ....शुभकामनायें आपको !

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  10. कार्य से पहले कर्ता हो, सही सार !

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  11. यही तो दिक्कत है लोग प्यास लगने पर कुआं खोदते है जहां तक माचिस की बात है ये बरसात में बडा दुख देती है

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  12. आपके मौलिक सोच की मैं ..कायल हूँ...

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  13. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके पोस्ट की है हलचल...जानिये आपका कौन सा पुराना या नया पोस्ट कल होगा यहाँ...........
    नयी पुरानी हलचल

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  14. amit ji
    kya solah aane sach baat likhi hai aapne ,tabiyat khush ho gai.
    machis ki teeli ka vikalp bahut hi achha laga.
    maih aapki likhi hui har ek baat se shat -pratishat sahmat hun.
    "कार्य से पहले कर्ता हो ,बस इत्ती सी बात है |"
    aapne apne lekh ke dwara gagar me sagar wali
    kahavat ko charitarth kar diya hai .
    bahut khoob
    isbadhiya se lekh ke liye
    bahut bahut badhai

    poonam

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  15. आपकी बात से सहमत ... समस्या को शुरुआत में ही पकड़ना अच्छा होता है ...

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  16. शुक्रवार को आपकी रचना "चर्चा-मंच" पर है ||
    आइये ----
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  17. कमाल है ..गज़ब का चिंतन है एकदम सटीक. शुक्रिया दुबारा शेयर करने का वर्ना हमारे पढ़ने से तो रह ही जाता.

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