मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

"काश ! मै टेडी बियर होता"

              'वैलेंटाइन डे' की खुशबू हवा में थी | गिफ्टों का, गुलाबों का, सुदर सुन्दर शो पीस बांटे जाने का दौर झमा झम चल रहा था| जिसे देखो वह कांख में एक अदद बुके दबाए, आँखों में चमक चमकाए और होंठो पर शरारती मुस्कान लिए चला जा रहा था | यह सब देख कर हमारी नसों में भी बचा खुचा खून कुछ खलबलाया और मन को हलोरने लगा कि हम भी किसी को कोई गिफ्ट दें और बदले में किसी नाज़ुक सी दोशीजा की शर्मीली और भारी पलकों का बोझ उठा सकें |
              बहुत सोचने के बाद भी कोई उपयुक्त पात्र नहीं नज़र आया ,फिर अचानक याद आया कि  गलती तो मेरी ही है | capital letter  के साथ capital letter  ही शोभा देता है और मै खामख्वाह small letter ढूंढ़ रहा था | इस नाजुक मौके पर मुझे capital में ही रहने वाली अपनी  निजी वा इकलौती पत्नी याद आ ही गई (जो capital भी है और italics भी ) | मैंने तय किया कि इस बार मै भी अपनी पत्नी को कोई गिफ्ट दे ही  दूँ | यह विचार आते ही पहले तो मैंने बड़ी गर्मजोशी से उन्हें  फ़ोन पे 'इजहारे-इश्क दिवस' के बारे में बताया और सच में पहली बार बड़ा रोमांस महसूस कर रहा था और रोमांच भी |पहले तो यह सोचा था कि कोई सरप्राइज गिफ्ट दे दूंगा ,फिर सोचा कि कहीं उन्हें पसंद ना आया तो पैसे की भी बर्बादी होगी सो, सोचा लाओ उन्ही से फ़ोन पर पूछ लेतें हैं | चूँकि फ़ोन पर प्यार इश्क की बात तो कभी हुई नहीं थी ,लिहाजा वह तो पहले से ही लजाई हुई थीं ,मेरे पूछने पर बड़ा मन दबाते हुए बोली कि एक टेडी बियर लेते आइयेगा ,वह भी काफी बड़ा सा |
              मैं मन ही मन यह सोच कर खुश हो रहा था कि, आज उनकी फरमाइश पूरी कर ही  देंगे ( जैसे उन्होंने नौ लखा हार माँगा हो ,और मै दिलाने जा रहा हूँ )| काफी मशक्कत के बाद पूछते पाछते मै एक गिफ्ट कार्नर पर पहुँच ही गया | वहां तो बहुत ढेर सारे ,छोटे बड़े ,रंग बिरंगे ,कुछ बड़ी बड़ी  आँखों के ,कुछ मिची मिची आँखों वाले ,कुछ के कान खड़े ,कुछ के गिरे कान और कुछ बहुत ही प्यारे से टेडी बियर अपने अपने गले में बो-टाई बांधे, बस बिकने का इंतज़ार सा कर रहे थे | तमाम सारी प्यारी प्यारी लडकियां और कुछ महिलायें भी उन बेचारे टेडी बियर को बस निहारे जा रही थीं |वे कभी किसी एक को  उठा लेती, फिर कभी हाथ से सहलाती, कभी तो अपने गाल पर लगाती, कभी चूम सा लेती और बोल उठतीं कि कितना नरम हैं, कितना  हल्का सा है, कितना cutie cutie है| मै तो एकदम स्तब्ध खडा था और मुझे तो यह लग रहा था कि इतना प्यार अगर यह लोग इस तरह करती रहेंगी तो कहीं वे टेडी बियर जीवित ना हो जाएँ |
                 उस दिन वहां दुकान पर मुझे इस टेडी बियर के बारे काफी जानकारी प्राप्त हुई ,ज्यादातर लड़कियों ने बताया कि वे उसे अपने साथ साथ हमेशा रखती हैं और कुछ तो उसे अपने साथ बिस्तर पर ही सुलाती भी है | कोई उसे कार में ले कर चलता है तो  कोई उसे परदे पर लटका देता है | कुछ लोग तो उस नामाक़ूल शो पीस को बाकायदा सोफे या कुर्सी पर विराजित करके रखते हैं ,भले ही मेहमान को ज़मीन  पर पालथी मार कर बैठना  पड़  जाय |
                  उसी समय से मुझे  टेडी बियर से इर्ष्या तो होनी शुरू हो चुकी थी ,पर क्या करता, मै अपनी मुमताज़ को एक अदद टेडी बियर लाने का वादा जो कर चुका था| सो एक बड़ा सा टेडी बियर सावले रंग का (अपने से मिलता जुलता ) लाकर मैंने अपनी श्रीमती जी को गिफ्ट किया ,वे बहुत ही प्रसन्न हुईं | अब तक वे उसे कई बार गले लगा चुकी हैं ,उसका मुहं  कई बार प्यार से नोच चुकी हैं, और लेटेस्ट यह है कि वे उसे बिस्तर के सिराहने सजा चुकी हैं और शायद मेरा बिस्तरा कहीं  सोफे वगैरह पर लगाया जा रहा है | मै शायद गुस्से में बडबडा रहा हूँ कि, मेरें मरने के बाद मेरी खाल में भी बस  नरम नरम फोम भरवा  कर टेडी बियर ही बनवा लेना, तभी शायद तुम्हारा सामीप्य और प्यार  पा सकूँ | काश ! मै टेडी बियर ही होता |

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही रोचक..............मज़ेदार................लोट-पोट करने वाली रचना।
    अच्छा चित्रांकन।
    टेडी बियर के साथ आजकल ऐसा ही व्यवहार देखने में आ रहा है। माँग भी बहुत बढ़ गयी है।
    निर्माता एवं वितरक तो मानव ही है.............पर क्या करे वह विवश है..प्राण नहीं डाल सकता अपनी इस रचना में.अन्यथा माँग को देखते हुए वह इनमें प्राण जरूर फूँक देता, और तब सभी चाहने वाले इससे दूर खड़े नज़र आते।

    टेडी बियर रूज़वेल्ट महोदय की देन हैं। उन्हीं के निकनेम ‘टेडी’ पर इसकी परिकल्पना साकार हुई है एक बार रूज़वेल्ट महोदय ने एक बियर को मार गिराया था, बस क्या था उनके निक नेम ‘टेडी’ (क्योंकि कद छोटा था उनका) के साथ बियर जोड़ कर चल पड़ा टेडी बियर का सिलसिला।

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  2. .

    Some people live in a very small world , they end up loving and caressing Teddy and Toys.

    While the other lot loves romancing with the harsh realities of life.

    .

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  3. खूब लिखा है..... :) यह सब जानकर तो काफी लोग चाहेंगें की वो टेडी बियर होते..... रोचक

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  4. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (17-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  5. अब तो टेडी बियर बने रहने में ही भलाई है, शेर बने कि कत्ल।

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  6. बड़ा प्यारा और मस्त लिखते हो यार ! आनंद आ गया ! अच्छे लेख के प्रति आभार आपका !
    घर में स्मार्ट कितने ही बनो मगर प्रवीण भाई की बात याद रखना ...

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  7. टेडी बेयर क्यों, यदि छोटा सा बटुआ होते तो और मज़ा आता :)

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  8. वाह...यह तो सुन्दर सोचा आपने.
    ______________________________
    'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !

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  9. बाकि सब जानकर तो लोग चाहेंगें की काश वे टेडी बियर होते, लेकिन हमारे ख्याल से परदे पर टांगने की बात उन्हें भाग खड़े होने पे मज़बूर न कर दे कहीं :) .... बहुत बढ़िया और मनोरंजक लेखन

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  10. 'वैलेंटाइन डे' की खुशबू साथ इकलौती पत्नी इजहार गिफ्ट और गिफ्ट में टेडी बियर जिसके साथ प्यार अगर यह लोग इस तरह करती रहेंगी तो कहीं वे टेडी बियर जीवित ना हो जाएँ | अंततः टेडी बियर सावले रंग का (अपने से मिलता जुलता ) गिफ्ट किया | अब तक वे उसे कई बार गले लगा चुकी हैं और शायद मेरा बिस्तरा कहीं सोफे वगैरह पर लगाया जा रहा है......मर्मशपर्शी व भावों से समाहित रचना !!

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