बुधवार, 18 अप्रैल 2012

" नजराना से जबराना तक........"


बिजली विभाग की सरकारी नौकरी करते करते काफी अरसा हो चला है । तमाम कहानी किस्से जुड़े है इस विभाग से । चूंकि जनता का सीधा सम्बन्ध होता है और ऊपर से बिजली इतनी आवश्यक हो चली है ज़िंदा रहने के लिए कि बिजली न रहने पर या खराब हो जाने पर जनता मरने मारने पर उतारू हो जाती है ।

इसी कारण जनता के बीच महत्त्व भी बहुत है बिजली वालों का । इसी से जुडा किस्सा कुछ यूँ है ।

कहते हैं ,बहुत पहले जब कभी कोई बिजली वाला किसी के काम के सिलसिले में उसके घर पहुँच जाता था तब लोग उसकी बहुत खातिर वगैरह करते थे । खूब आवभगत और खिलाने पिलाने के बाद उसे जबरदस्ती टोकन के तौर पर कुछ रुपये भी देते थे और यह कहते थे कि आप हमारे घर पधारे ,उसके लिए आभार और नज़र के तौर पर इन रुपयों को रख लें । चूँकि मामला सम्मान से जुडा होता था ,लोग तनिक न नुकुर के साथ रख लेते थे । यही नज़राना कहलाता था ।

धीरे धीरे वक्त बीतता गया । आने वाली पीढियां यही कहानी सुनती थीं और यही क्रम चलता रहा । धीरे धीरे विभाग के लोगों में भी गिरावट आई और जनता भी सोचने लगी कि इनकी नज़र उतारने का क्या औचित्य ।लेकिन लोग (कर्मचारी वगैरह ) जाते थे जब किसी के यहाँ तब लोग नज़र के तौर पर तो नहीं, हाँ !थोड़ा बहुत एहसान मान उन्हें शुक्रिया अदा करने के उद्देश्य से कुछ रुपये वगैरह दे दिया करते थे ,जो शुकराना कहलाया जाने लगा ।

कुछ समय और बीता । नौजवान किस्म के लोग विभाग में आये और जनता में भी नौजवान लोग ही कर्मचारियों से संपर्क में आने लगे । अब जब काम ख़त्म करके लोग शुकराना के इंतज़ार में वहीँ खड़े रहते तो लोग कह उठते ,किस बाते के रुपये - पैसे ? यह तो तुम्हारा विभागीय कार्य है ,तुम्हारा दायित्व है ,तुम्हे तो करना ही है । इस पर वे सदियों से सुनते आये सुनी सुनाई कहानी सुना देते और फिर धीरे धीरे यह कहने लगे कि ये तो हमारा हक़ है और जो आप देते हो वह हमारा हकराना है । इस तरह हकराना के नाम पर कुछ कुछ फिर पाने लगे ,वे बिजली वाले ।

वक्त के साथ थोड़ी गिरावट और आई । जनता में भी और बिजली वालों में भी । अब तो अव्वल वे काम करते नहीं ,और कभी आपके घर पहुँच गए तो काम खुद तो करेंगे नहीं । उसे कराने के लिए अपने साथ निजी आदमी रखते है और काम के बाद आपसे जबरदस्ती पैसे भी मांग लेते हैं, जिसे अब वे जबराना कहते हैं । 

"इस कहानी का सम्बन्ध किसी घटना या व्यक्ति से नहीं है ,यदि किसी को दुःख पहुंचता है तो हमें खेद है "

13 टिप्‍पणियां:

  1. :-)

    बहुत बढ़िया.......
    एक दम सटीक.............
    सादर
    अनु

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  2. बिजली वाले पढ़ेंगे तो बिजली काट देंगे और कहेंगे कि इस हरकत से अगर किसी को दुख पहुंचता है तो हमें खेद है। :)

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  3. मनुष्य के जबरिया विकास की महत्वपूर्ण कड़ी।

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  4. ओहह तो ये कहानी है नज़राना,शुक्राना,हकराना और जबराना की :)


    सादर

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  5. कल 20/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. तरक्की हुई है ज़माने भर की , नजराना से जबरन तक पहुंचे आखिर !
    रोचक व्यंग्य !

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  7. ये जबराना हर जगह व्याप्त होता जा रहा है...

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