सोमवार, 23 दिसंबर 2013

" कम से कम इतना तो है ......"

पाँच राज्यों में चुनाव हुए ,सरकारें चुनी गई ,मुख्यमंत्री बने । सभी नए मुख्यमंत्रियों ( दिल्ली को छोड़ कर ) के चेहरे खिले खिले से ,विजयी मुस्कान लिए ,चेहरे पर राजा बन जाने के भाव ,लम्बी गाड़ियों के काफिले और दिल्ली में जब से अरविन्द केजरीवाल का मुख्यमंत्री बनना तय हुआ ,उनके चेहरे पर चिंता के , जिम्मेदारियों के भाव और प्रबल हो गए । आँखों से नींद उड़ी उड़ी सी ,शायद मन में एक ही चिंता ,कैसे पूरा कर पाऊँगा जनता के वायदे । 


देखा जाए तो अरविन्द केजरीवाल के पास खोने को कुछ नहीं । पहली बार ही जनता का इतना विश्वास हासिल कर थोड़ा बहुत भी जनता की भलाई के कार्य कर दिए तो भी श्रेय ही मिलेगा । अगर वह चाहे तो तसल्ली से मुख्यमंत्री बन कर बाकी अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह चेहरे पर राजसी भाव लिए शपथ ले लें और सरकारी तामझाम से अपने को घिर जाने दें पर नहीं उनके चेहरे पर चिंता /हताशा की लकीरें बता रही हैं कि उनके मन में कुछ कर गुजरने का भाव तो है । हो सकता है वायदे पूरे करने में सरकारी खजाने में धन का अभाव आड़े आये पर अगर मंशा साफ़ है तो परिणाम अच्छे ही होने वाले हैं । 


कल किसी बड़े नेता ने कहा देश को कार्पोरेट की तरह से नहीं चलाया जा सकता । ठीक ही है राबड़ी देवी चला सकती हैं ,अखिलेश यादव चला सकते हैं ,पुराने नेताओं के सुपुत्र चला सकते हैं पर एक ज्यादा पढ़ा लिखा व्यक्ति अगर देश चलाने आगे आता है तो वह कार्पोरेट कल्चर हो गया । सारे औद्दोगिक घरानों से सांठ गाँठ तो पुरानी बड़ी पार्टियों की ही है  । अरे अब तो कुछ अच्छा होने दीजिये ।कब तक 'still worse to come' की बाट जोहते रहेंगे ।  


कम से कम अरविन्द केजरीवाल की बॉडी लैंग्वेज तो यही कह रही है कि उनके मन में कुछ तो अच्छा करने को है । 

                                                            "भारतीय राजनीति में शायद कोई सेंटा क्लाज़ आ ही जाए "। 

9 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल बज़ा फ़रमाया...नए लोगों के लिए रास्ता बनाइये...पुराने नेताओं के वारिस उनसे ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं...

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  2. देखते हैं ..... फ़िलहाल तो उन्हें शुभकामनायें .....

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  3. एक उम्मीद को परखने के लिए शुभकामनायें दी ही जानी चाहिए !

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  4. जितना समय मिला है, जितनी शक्ति संभव है, निर्लिप्त भाव से कार्य करना चाहिये, बिना राजनीति में उलझे।

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  5. कुछ नया करने का जज्वा तो रखते है ...!उन्हें शुभकामनायें .....
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    RECENT POST -: हम पंछी थे एक डाल के.

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  6. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन मोहम्मद रफ़ी साहब और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  7. उम्मीद है कुछ तो नया और सकारात्मक ही होगा... और यदि ऐसा होता है तो सचमुच भारतीय राजनीति में सेंटा क्लाज़ के आगमन जैसा ही होगा ...

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  9. एक मौका इन्हें मिले तो क्या हर्ज़ है?

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