शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

" केहि विधि प्यार जताऊं ..........."


कबहुँ आप हँसे ,
कबहुँ नैन हँसे ,
कबहुँ नैन के बीच ,
हँसे कजरा  ।

कबहुँ टिकुली सजै ,
कबहुँ बेनी सजै ,
कबहुँ बेनी के बीच ,
सजै गजरा । 

कबहुँ चहक उठै ,
कबहुँ महक उठै ,
लगै खेलत जैसे,
बिजुरी औ बदरा । 

कबहुँ कसम धरें ,
कबहुँ कसम धरावै ,
कबहूँ रूठें तौ ,
कहुं लागै न जियरा । 

उन्है निहार निहार ,
हम निढाल भएन  ,
अब केहि विधि  ,.
प्यार जताऊं सबरा । 


26 टिप्‍पणियां:

  1. कबहुं पोस्ट लिखौ,
    कबहुं फ़ोटो लगाओ,
    कबहुं उठाओ नखरा।

    कबहुं सुघड़ बताओ,
    कबहुं नीक बताओ,
    कबहुं उठाओ नखरा।

    बस यही राह चलौ,
    कछु न मन में धरौ
    जताओ प्यार सबरा।

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    1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
      आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (17-04-2013) के "साहित्य दर्पण " (चर्चा मंच-1210) पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
      सूचनार्थ...सादर!

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  2. उन्है निहार निहार ,
    हम निढाल भएन ,
    अब केहि विधि ,.
    प्यार जताऊं सबरा ।

    ..बहुत सुन्दर...

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  3. दुविधा तो है :) वैसे अनूप जी सब कह दिए हैं ....

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  4. कल दिनांक 14/04/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. वाह !क्या बात है .....सुन्दर पोस्ट

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  6. हा हा हा ...बहुत मजा आया पढने में ....नटखट सी रचना ...

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  7. कबहुँ चहक उठै ,
    कबहुँ महक उठै ,
    लगै खेलत जैसे,
    बिजुरी औ बदरा..

    बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति!!!
    पधारें "आँसुओं के मोती"

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  8. कैसे कहें...अब इतनी मन चुराती बातों के बीच दिल की बात ही कहना रह जाती है...औऱ कभी कभी हम टापते रह जाते हैं और ..... और.....बस और रह जाता है

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  9. बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति !शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

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  10. शानदार!!!

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page


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  11. क्या बात है दोस्त भाषिक (आंचलिक )सौन्दर्य सौष्ठव का शिखर है यह रचना .

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  12. समस्या तो है :)
    हमारे पास तो सिर्फ सहानुभूति है, वही देकर जा रहे हैं :)

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  13. bahut hi pyari kavita aur is bhasha ne is kavita ke saundrya ko char chand laga diye :-)

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