"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।
वाह ... क्या अंदाज़ है ... जय हो !
क्या बात है..
बहुत बढ़िया ...
वो नहीं सुनता उसे जल जाना होता हैं। प्यार दीवाना होता हैं।
बहुत उम्दा भाव पूर्ण रचना,,,अमित जी ,,,Recent post: रंग गुलाल है यारो,
क्या बात भाई .... बहुत चोट खाए लगते हैं हुज़ूर |
कभी कभी पता ही नहीं चलता है कि काँटों से खेल रहे हैं...गहन अभिव्यक्ति...
बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति,आभार.महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!
गहन अभिव्यक्ति ।सुंदर रचना ।
दिनांक 11/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .धन्यवाद!
गज़ब का दर्द है रचना में.
सार्थक और सुंदर रचना .....आप भी पधारो स्वागत है ...http://pankajkrsah.blogspot.com
bhavpurn- atiutam-***
दर्द को बहुत संवेदना के साथ प्रस्तुत किया आपने ..मगर दर्द किसी भी सूरत में हो दर्द खूबसूरत नहीं हो सकता ...
वाह ... क्या अंदाज़ है ... जय हो !
जवाब देंहटाएंक्या बात है..
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया ...
जवाब देंहटाएंवो नहीं सुनता उसे जल जाना होता हैं। प्यार दीवाना होता हैं।
जवाब देंहटाएंबहुत उम्दा भाव पूर्ण रचना,,,अमित जी ,,,
जवाब देंहटाएंRecent post: रंग गुलाल है यारो,
क्या बात भाई .... बहुत चोट खाए लगते हैं हुज़ूर |
जवाब देंहटाएंकभी कभी पता ही नहीं चलता है कि काँटों से खेल रहे हैं...गहन अभिव्यक्ति...
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति,आभार.महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!
जवाब देंहटाएंगहन अभिव्यक्ति ।
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना ।
जवाब देंहटाएंदिनांक 11/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!
गज़ब का दर्द है रचना में.
जवाब देंहटाएंसार्थक और सुंदर रचना .....
जवाब देंहटाएंआप भी पधारो स्वागत है ...
http://pankajkrsah.blogspot.com
bhavpurn- atiutam-***
जवाब देंहटाएंदर्द को बहुत संवेदना के साथ प्रस्तुत किया आपने ..मगर दर्द किसी भी सूरत में हो दर्द खूबसूरत नहीं हो सकता ...
जवाब देंहटाएं