गुरुवार, 21 मार्च 2013

"कविता दिवस ................"


दस्तूर निभाना है ,
कविता लिखना है ,
सुबह से शाम हुई ,
कविता न तैयार हुई ।

तैरते ख्याल ,
न जाने डूबे कहाँ ,
टटोला दिल को ,
रूठ कर बोला ।

कभी लिख पाए हो ,
यूँ अकेले तुम,
जरा तसव्वुर में ,
'उन्हें' आने दो ,
फिर अपनी कलम,
बह जाने दो ।

बेख्याली में ख्याल,
जब उनका आया ,
खुद को कविता,
में लिपटा पाया  ।

अब कविता न अधूरी थी  ,
भर उठी खुशबू से पूरी थी ,
पायल सी वह बजने लगी ,
बोल वह गुनगुन करने लगी ।

अब कविता ,
में जान थी ,
या मेरी 'जान' ,
कविता में थी  । 


26 टिप्‍पणियां:

  1. बैठे हों तसव्वुर में किसी के, ऐसे में कविता छम्म से आ जाए तो क्या हो :)

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    1. कवि जी उठेगा बस और फिर क्या चाहिए उसे ..।

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  2. कविता में आपकी जान थी इसलिए तो जी उठी कविता...
    बहुत सुन्दर....

    सादर
    अनु

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    1. जी तो उठती है ,मेरी कविता हर बार ,पर प्रायः क्षण भंगुर ही रहती है ।

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  3. कवि कहना चाहता है कि अपना उसका कुच्छ नहीं है। जो है सो सब तस्व्वुर,उनके कारण है!

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    1. आप तो 'तसव्वुर' पर भी रोयल्टी का प्रतिबन्ध लगा देंगे ,लगता है ।

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  4. कविता स्वयं बनती है जैसे आपकी बन् गयी.... बधाई...

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  5. चाह लें तो राह निकल आती है, कविता में भी..

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  6. तस्सव्वुर बिना कविता की रचना में रस ही कहाँ जनाब | बहुत खूब कहा आपने | बधाई

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  7. bahut sundar bhaav ..bhav se bani kavita ...beh rahe armaan ..behi pyar ki sarita...
    badhai :-)

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  8. कविता में अपनी ही ''जान '' बसी हुई है

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  9. बेख्याली में भी इतने खूबसूरत ख्याल कि कविता बन गुनगुन करने लगे छन से छनक उठे... बहुत खूब...बधाई

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  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (23-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  11. जब कविता लिपटती है तब जान होने का अहसास भी होता है..

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  12. जब मन भाव आते है तभी कविता बा पाती है ,,,,बहुत ही सुंदर रचना,,,बधाई
    होली की हार्दिक शुभकामनायें!
    Recent post: रंगों के दोहे ,

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  13. जब मन रमा कविता में
    कविता क्यूँ ना बनती ...
    बहुत सुंदर ....
    शुभ-कामनाएं

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  14. कविता में जान...और जान में कविता..... दोनों ही एक-दूजे के पूरक.... :-)
    सुंदर अभिव्यक्ति!
    ~सादर!!!

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  15. मन में हो मान-भरी,सबद-सबद कविता में जान पड़ी!

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  16. कविता दिवस पर सार्थक कविता का सृजन.

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  17. बहुत सुन्दर ...
    पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "

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  18. बहुत सुंदर ..... आज कल हर चीज़ का दिवस होने लगा है ...

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