रविवार, 30 अक्तूबर 2011

"एक बार, तुम आओ बस !!!!!"


एक बार,
तुम आओ बस,
नेह का दीपक जला,
राह तुम्हे दिखलाऊंगा,
राह तुम्हारी,
अक्षत कुमकुम,
रोली चन्दन, 
बिखराऊंगा,
बना पालकी पलकों की,
नित तारों की सैर कराऊंगा,
एक बार,
तुम आओ बस,
आंसू तेरे आँखें मेरी,
अधर तुम्हारे हंसी हमारी,
नित रौशनी बिखराऊंगा,
एक बार,
तुम आओ बस,
प्यार करूँ,
बस सांझ सवेरे,
दिन-रात सताऊँगा,
एक बार,
तुम आओ बस,
अंत समय है अब शायद,
पर तुमको तो होश कहाँ,
स्वप्न रचा था एक ऐसा,
हो हथेली दोनों तेरी,
और मुहं छुपा लूं मै अपना,
सुबक सुबक रोऊँ खूब,
और प्राण त्याग दूं मैं अपना, 
एक बार,
तुम आओ बस !!!


16 टिप्‍पणियां:

  1. कल 01/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  3. एक बार,
    तुम आओ बस,
    आंसू तेरे आँखें मेरी,
    अधर तुम्हारे हंसी हमारी,
    नित रौशनी बिखराऊंगा,बेहतरीन अभिवयक्ति....

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  4. waah...
    ek baar...
    na jane kitni baar...
    yunhi bulaya tha
    tumhe manaya tha
    is baar bhi maan jao
    aa jao
    ek baar...

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  5. एक बार,
    तुम आओ बस.....!

    हृदय की कोमलतम अभिव्यक्ति.........!!

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  6. बहुत उम्दा और सार्थक प्रस्तुति! बधाई !

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  7. बड़े खतरनाक इरादे हैं।

    सुबक सुबक रोऊँ खूब,
    और प्राण त्याग दूं मैं अपना,

    यह किसी थानेदार ने पढ़ लिया तो खुदकसी की कोशिश के इल्जाम में बैठा लेगा थाने में दिनभर!

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