सोमवार, 20 अप्रैल 2026

नियति / प्रारब्ध / भाग्य

"नियति व्यापकता लिए हुए है। नियति संसार की होती है ,इसे ही  प्रकृति की चाल कहते हैं।"

"प्रारब्ध आपके हिस्से की नियति है।"

"भाग्य आप अपने कर्म से बनाते है। कर्मफल को रेट्रोस्पेक्ट में देखते है तो भाग्य कहलाता है।"

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