सोचता हूँ ज़िन्दगी में ऐसा कुछ नही किया जिस पर फख्र किया जा सके। पूरे जीवन मे एक बानगी तो ऐसी हो जिसके सहारे इस जीवन रूपी गिफ्ट के बदले ईश्वर को रिटर्न गिफ्ट दी जा सके।
पतंग उड़ती देख सोचता हूँ पतंग का अविष्कार करने वाला भी कितना विद्वान रहा होगा।
वो बिरले ही होते है जिन्हें ऐसे कुछ नया करने की कुदरती नेमत मिलती है।
पूरे देश मे किसी भी क्षेत्र में जो पी एच डी लोगों को दी जा रही है उसके विषय मे एक श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए कि उन लोगों के कार्य से लोगों के जीवन मे क्या गुणात्मक परिवर्तन हुआ है या भविष्य में होगा।
"शून्य का अविष्कार हमने किया है ,इसे कितने युगों तक भुनाते रहेंगे। बनाने वाले तो पब जी ,टिक टॉक और उनो जैसे गेम बनाकर अमर हो गए।"
आईआईटी से भी डिग्री मिलने में यह बाध्यता होनी चाहिए कि विद्यार्थी ने उन चार या पांच सालों में कोई नई सोच,कांसेप्ट या थ्योरी संकल्पित भी की अथवा नही।
एमबीए और सीए का ध्येय बस एक रहता है कि रुपये में पांच चवन्नी कैसे बनाई जाए। जितने भी बिजनेस मॉडल है सबमे उपभोक्ता का और कार्मिकों का शोषण ही है। जहां यह बेहतर है वो इसलिए कि वहां लाभ का मार्जिन अप्रत्याशित रूप से बहुत अधिक है।
प्रत्येक उच्च शिक्षित व्यक्ति की यह सोच होनी चाहिए कि ऐसा क्या करें कि जीवन सरल हो जाये, चाहे वो कृषि का क्षेत्र हो, मनोरंजन,खेल का क्षेत्र हो या चिकित्सा सुविधा का ही क्षेत्र हो या जीवन का कोई भी क्षेत्र हो।
दरअसल समाज की प्रचलित सोच ही नए युवकों की सोच को प्रभावित करती है। प्रचलन ही यही है कि डिग्री लो नौकरी करो मशीनी ज़िन्दगी जियो ,कुछ नया करने की न सोच है न जरूरत है।
जीवन व्यर्थ न हो जाये कुछ तो करना होगा।
इन क्षेत्रों में कुछ नया किये जाने की आवश्यकता है :
१. कृषि के क्षेत्र में। किसी भी आपदा या विपदा में खड़ी फसल कैसे सुरक्षित रहे ,इस पर कोई काम नही किया गया।
२.रेन हार्वेस्टिंग ,यह केवल सेमिनार और एन जी ओ तक ही सीमित है।
३.टाउन प्लानिंग , क्या छोटे और क्या बड़े शहरों कस्बो का बारिश में बुरा हाल होता है। जल निकासी का कोई कॉन्सेप्ट ही नही।
४.आउटर रिंग रोड कब इनर रिंग बन जाती है पता ही नही चलता। प्लानिंग बहुत लंबे समय के हिसाब से की जानी चाहिए।
५.सड़क दुर्घटनाये,रेल दुर्घटनाये तकनीकी रूप से कैसे कम की जाएं कोई ब्लू प्रिंट नही।
६.,गांव शहर की तरफ रुख न करें इस पर कोई ठोस प्लान नही।
७.RPL रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग एक अच्छी पहल है सरकार की ,परन्तु लाभ नही मिला जिन्हें मिलना चाहिए था।
८.पंचर बनाना, साईकल रिपेयर, बाइक रिपेयर,प्लम्बर,इलेक्ट्रीशियन,हेयर ड्रेसर जैसे कामो के लिए मॉड्यूल विकसित किया जाता। जिसे गांव गांव तक विस्तारित करते और सम्मान भी मिलता।
शोषण कैसे होता है इनका, अर्बन क्लैप वालों से समझिये।
९.स्कूली शिक्षा कम हो व्यवहारिक ज्यादा हो और रोजगार परक हो ,बहुत सुधार की आवश्यकता है।
१०.गांव के स्तर पर नर्सों की भर्ती और उन्हें प्रेरित कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में सम्मलित किया जाना ,यह गेम चेंजर हो सकता समाज के लिए।
कुछ तो करें ,न करें तो सोचे ही कुछ नया। कब तक महाभारत और रामायण देख खुश होते रहेंगे। उस समय के ऋषियों मुनियों जैसी विद्या ही हासिल कर ली जाए दुबारा।

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