शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

" पुच्ची बनाम ............चुम्मा "


'फुरसतिया' आजकल प्रतिदिन सवेरे सूरज और उनकी किरणों के बीच होने वाली बाल सुलभ अठखेलियों का वर्णन करते हैं । उसी वर्णन के क्रम में आज उन्होंने सूरज और उनकी किरणों के मध्य 'फ़्लाइंग किस' यानि 'उड़न चुम्मा' का उल्लेख कर दिया । बाद में उन्हें आभास हुआ कि पिता-पुत्री के बीच 'चुम्मा' शब्द के स्थान पर 'पुच्ची' का प्रयोग अधिक उचित है और फिर उन्होंने अपने वर्णन में अभीष्ट संशोधन भी कर दिया ।

बस यहीं से बात चल निकली कि 'चुम्मा' और 'पुच्ची' में क्या और कितना अंतर है । स्नेह दर्शाने के लिए सर्वप्रथम किसी को पुचकारा जाता है और पुचकार शब्द पुचकारने के दौरान उपजे पुच्च पुच्च की ध्वनि से ही बना है । पुचकारने दुलराने के साथ साथ किसी को स्नेहवश गाल या माथे पर चूमने को ही 'पुच्ची' लेना कहा गया है  । 'पुच्ची' पुचकार का ही लघु रूप है । इसमें वात्सल्य रस कूट कूट कर भरा हुआ है । माताएं अपनी संतान को बलैय्या ले ले कर उनकी 'पुच्ची' लेती रहती हैं और कभी खट्टी कभी मीठी 'पुच्ची' कह कर मुग्ध होती रहती हैं । 'पुच्ची' में मातृत्व लुटा देने का भाव निहित होता है । बच्चे की 'पुच्ची' लेने में जो सुख प्राप्त होता है उससे कहीं अधिक आनन्द यदि बच्चा अपनी माँ / पिता की 'पुच्ची' ले ले तो प्राप्त होता है । मासूम से बच्चे के होंठों का स्पर्श अपने गालों पर माँ पाकर हर्षविभोर हो उठती है । 'पुच्ची' एक अत्यंत मासूम और निश्छल भाव उत्पन्न करती है । इसमें लोच है । ईश्वर के होने की अनुभूति जैसी होती है ।

'चुम्मा' सीधे सीधे चूमने / चुम्बन लेने का वृहद रूप है । वयस्कों के मध्य घटित होने वाला एक सामान्य प्रेम भाव है । प्रेम के दौरान समर्पित होने का भाव इसी से प्रकट होता है । इसमें अधिकार अधिक है और निवेदन अत्यंत कम और कभी कभी 'बलात' का भाव भी इसमें निहित होता है । प्रेम प्रक्रिया पूर्ण करने में 'चुम्मा' प्रथम सोपान है ,जबकि स्नेह की श्रेणी में 'पुच्ची' अंतिम सोपान है ।

'चुम्मा' स्मृति बन बहुत समय तक मन को मन ही मन दुलराता रहता है जबकि 'पुच्ची' का भाव बस क्षणिक होता है । अंग्रेजी में अंतर स्पष्ट करें तो 'पुच्ची' 'किस्सी'  है और 'चुम्मा' एक 'किस' । 

17 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन 7 फरवरी वर्षगांठ और वैवाहिक वर्षगांठ सब एक साथ मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. जय हो आपकी, इतना सूक्ष्म विलेश्षण तो कोई मनीषी ही कर सकता है।

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  3. बहुत बारीक और सटीक विश्लेषण है और सबसे अच्छी बात
    है की एक सार्थक अभिव्यक्ति है। सादर नमन।

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  4. अच्छे लोग गलतियों से भी कुछ न कुछ सीखने लायक ढूँढ ही लेते हैं।

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