सोमवार, 19 अगस्त 2013

"पैमाइश लफ़्ज़ों की......"


देखा है मैंने ,
अक्सर लब तुम्हारे ,
कुछ कहने से पहले ,
हो जाते हैं आड़े तिरछे,

शायद ये लब ,
करते है पहले ,
तितर बितर होते ,
लफ़्ज़ों को तरतीब में ,

फिर टांकते चलते है ,
कतरा दर कतरा ,
अपनी नज़्म सी नालिश ,
मेरे सीने पर ,

इस बेतरतीबी की ,
तरतीबी में यूँ ,
लबों की नुमाइश ,
अच्छी नहीं होती ,

कोई जरूरी तो नहीं ,
मोहब्बत में हर वक्त ,
हो पैमाइश लफ़्ज़ों की ,
उनकी पैदाइश से पहले ,

मेरी तो आज भी ,
ख्वाहिश बस वही ,
जब भी हो ,
पहलू में तुम ,

न हो नुमाइश ,
लफ़्ज़ों की ,
न हो पैमाइश ,
मानी की ।      ('मानी' - 'मायने' )

                                          "लबों पर जब भी जुम्बिश हो तो बस एक 'तबस्सुम' ठहर जाए"  

13 टिप्‍पणियां:

  1. न हो नुमाईश लफ़्ज़ों की.…
    मन से मन को राह होती है सब कहते हैं !

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  2. इस बेतरतीबी की ,
    तरतीबी में यूँ ,
    लबों की नुमाइश ,
    अच्छी नहीं होती ,
    ***
    मौन कहता है सबकुछ...!

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  3. इस बेतरतीबी की ,
    तरतीबी में यूँ ,
    लबों की नुमाइश ,
    अच्छी नहीं होती ,

    सुंदर सृजन लाजबाब प्रस्तुति,,,
    RECENT POST : सुलझाया नही जाता.

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  4. अपनी नज़्म सी नालिश ,
    मेरे सीने पर ..... khoobsoorat prastuti

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  5. बहुत ही सुंदर लाजबाब प्रस्तुती, आभार।

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  6. बहुत प्यारी सी नज़्म है... मुस्कुराने को दिल करता रहा पढ़ते हुए...

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  7. रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    -----------------------

    कल 21/08/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  8. मौन तरंगो का जब दिल पे प्रहार होगा
    लबो का आयाम क्या आभास होगा…
    सुन्दर प्रस्तुति

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  9. बेहतरीन .सुन्दर अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाईयां.रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएं .

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  10. इतने सूक्ष्म अवलोकन को इतनी सुन्दरता से सहेजना कोई आपसे सीखे।

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