रविवार, 4 सितंबर 2011

"टीचर्स डे".... ’५ सितम्बर ’ तिथि नहीं, एक संस्कार....

       यदि सबसे सुन्दर और मनोरम दृश्यों की बात की जाए तब निश्चित तौर पर लोग प्राकृतिक सौन्दर्य की
ही बात करेंगे | यह भी हो सकता है, कुछ लोगों को तितलियों के अथवा मोर पंखों के रंग लुभावने लगते हों, परन्तु मुझे सबसे अच्छा और प्यारा दृश्य लगता है "सवेरे सवेरे नन्हे मुन्ने बच्चों  का स्कूल जाना" | उन्हें देख ऐसा प्रतीत होता है ,मानो प्रकृति के सभी  रंग खुद जीवन्त हो उठे हों और धरती के विशाल कैनवास पर बिखर जाने को बेताब हों | मजे की बात यह होती है कि विभिन्न प्रकार के यह रंग आपस में मिलकर नित नए और अत्यंत मनोरम चित्र   बनाते हैं और अगले दिन पुनः ये सभी रंग नई चित्रकारी के लिए बेताब दिखते हैं |
       इस चित्रकारी की तूलिका के रूप में होते हैं ,इन बच्चों के शिक्षक / शिक्षिकाएं  | सारे बच्चे अपने मन में ढेरों  कौतूहल रुपी रंग भरे होते हैं,जिन्हें उनके शिक्षक / शिक्षिकाएं रंगों के गुण दोष के अनुसार तूलिका का चयन कराते  हैं,और बच्चों के माँ बाप उन चित्रों को देख देख मुदित होते रहते हैं |
       रंग कितने भी अच्छे हों ,परन्तु यदि तूलिका उचित प्रकार एवं दशा की न हो तो सभी रंग बिखर जाते हैं और चित्र भी खराब हो जाते  है | अर्थात सबसे अधिक महत्त्व प्रारम्भिक शिक्षक/शिक्षिकाओं का ही होता है | नन्हे बच्चों में अपने शिक्षक के प्रति सम्मान एवं विश्वास कूट कूट कर भरा होता है | घर जो बातें माँ बाप बताते है ,उन्हें वे नहीं मानते परन्तु यदि वही बातें स्कूल में शिक्षक/शिक्षिकाए  बता दें तो बच्चे तुरंत मान लेते हैं और अपने माँ बाप को भी मनवाने  को मजबूर कर लेते हैं | ऐसे में शिक्षक/शिक्षिकाओं का दायित्व अत्यंत अधिक हो जाता है |

         समाज में  शिक्षक/शिक्षिकाओं का स्थान सर्वोपरि और सम्मान जनक होना चाहिए और  शिक्षक/शिक्षिकाओं को भी अपने दायित्व के प्रति ईमानदारी बरतते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु प्रयास रत रहना चाहिए |   
            ऐसा  हो  जाए तो फिर आ ही जाएँ "तारे ज़मीं पर" |

12 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों के सुन्दर भविष्य की नींव होता है ..
    सभी शिक्षकों को शुभकामनायें!

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  2. जिस समाज में शिक्षकों का सम्मान होता है, उस समाज का विश्व में सम्मान होता है।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    शिक्षक दिवस की शुभकामनायें.

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  4. सभी शिक्षकों को नमन ......सार्थक प्रस्तुति

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  5. शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ सर।

    सादर

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. ना तो अच्छे गुरु रहे,ना ही अच्छे शिष्य.
    कौन सँवारे किस तरह,बच्चे तेरा भविष्य.

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  8. सही मौके पर सही ढंग से सुन्दर बात.

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  9. 'शहरे का मेला बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. कोटा का शहरे का मेला पूरे देश मे प्रसिद्द है'...सुविधि का बेटा चिल्ला चिल्ला कर याद कर रहा था.सुविधि ने बेटे से वाक्य सुधारते हुए कहा-'शहरे का नही दशहरे का'
    सुविधि जो मेरे साथ ही पढ़ाती है उसके बेटे ने जवाब दिया-'नही यह शहर ही है मेरी मेडम ने बोर्ड पर यही लिखा था.वो गलती नही करती.''
    यह एक बच्चे का अपने टीचर पर विश्वास को दर्शाता है किन्तु........ एक स्थान पर नही कई स्थान पर दशहरे के स्थान पर उनका 'शहरा' लिखना ....?????
    एक टीचर की गलती विद्यार्थी ही नही पूरे परिवार और समाज को.
    कोलेज और स्कूल लेक्चरर की पोस्ट छोडकर मैंने इन छोटे बच्चो के स्कूल्स को चुना जाने क्यों अपने टीचर्स के द्वारा जीवन मे मिले कुछ कटु अनुभवों ने मुझे प्राथमिक शिक्षण चुनने को प्रेरित किया.....वह जगह जहाँ बच्चे की,उसके भविष्य की नींव बनती है.जहाँ एक बच्चा पहली बार अपने घर और माँ से दूर हो कर आता है.टीचर को अपने प्यार का पलडा उस बच्चे की माँ के प्यार से ज्यादा भारी रखना होता है बच्चे को स्कूल और अपनी ओर खींचने के लिए. है ना?
    हा हा हा
    किन्तु हमारे देश मे सबसे ज्यादा प्राथमिक शिक्षा को ही नेगलेक्ट किया जाता है और उनके टीचर्स को हेय दृष्टि से देखा जाता है
    ओह! कुछ आर्टिकल्स कितना बोलने को बाध्य कर देते हैं हा हा हा जैसे आपका यह वाला .....

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