गुरुवार, 21 जुलाई 2011

"गैस के गुब्बारे"

                एक छोटा बच्चा गैस के गुब्बारे बेचने वाले से गुब्बारा खरीदने गया ,तो उसने गुब्बारे वाले से पूछा ,भैया तुम्हारे पास तो बहुत सारे रंग बिरंगे ,छोट बड़े गुब्बारे है | क्या जो गुब्बारा बहुत सुन्दर है ,या जो बहुत बड़ा है ,आकाश में सबसे ऊपर वही गुब्बारा जाएगा | गुब्बारे वाला हंसने लगा और बोला, नहीं बेटा ,गुब्बारे के रंग और आकार से यह नहीं तय होता कि आकाश में कौन  सा गुब्बारा सबसे ऊपर जाएगा | गुब्बारे में गैस  होती है ,जिसके कारण गुब्बारा ऊपर जाता है | जिसमे जितनी ज्यादा गैस ,और वह भी देर तक रहेगी ,वह गुब्बारा ज्यादा ऊपर तक आकाश में पहुँच जाएगा | 
                   ऐसा ही कुछ मनुष्य के जीवन में भी होता है | मनुष्य के रंग, रूप ,आकार ,प्रकार ,जाति, धर्म से यह कभी निश्चित अथवा सिद्ध नहीं होता कि वह व्यक्ति जीवन में कितनी उंचाई तक तरक्की करेगा | उसके अन्दर बस ऊपर उठने के लिए गैस रुपी प्रबल इच्छा शक्ति और दृढ़ संकल्प होना आवश्यक है |
                  विद्यालयों में शिक्षक और घर में माँ-बाप का बस इतना सा दायित्व है कि बच्चों के भीतर बस उसी  "गैस" का आवश्यक दबाव बनाए रखे ,फिर तो उसे आसमान में परिंदों को चुनौती देनी ही है |    

18 टिप्‍पणियां:

  1. ऊपर उठने के लिए गैस रुपी प्रबल इच्छा शक्ति और दृढ़ संकल्प होना आवश्यक है
    बहुत सटीक !!

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  2. Really, colour , cast , face, hight, and birth-place are doesn't matter for a person to be successful ; only one thing is must that is-" gas"
    or "positive energy " . Very good writing.Thanks.

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  3. सच कहा .. पर समाज में कई होते हैं जो गुबारे की हवा निकालने को तत्पर रहते अहिं .. उनसे बचना भी जरूर सिखाना चाहिए ... प्रेरक लिखा है ...

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  4. बहुत ही सुन्दर

    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/
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  5. baat to sachhi hai... lekin bachha to ye baat samajh gaya lekin bade hi to nahin samajhte is baat ko...

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  6. जिंदगी की इतनी जरुरी बात को कहने का बहुत सही ढंग ...बहुत उम्दा अमित जी

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