शनिवार, 9 जुलाई 2011

"पलकोँ में समाई बारिश"



        
बारिश  को खुली आंखोँ  से देखने की एक बार कोशिश की ,
                                बूंदे पलकोँ में उलझ गईं और आँसू बन आँखों में समा गईं शायद,
              तभी शायद ये आँसू कभी सूखते नही,
                                                    और वैसी बारिश भी तो अब नही होती ।
                                                                

11 टिप्‍पणियां:

  1. बारिश को अगर खुली आंखोसे देख्नेगे तो यही होगा !
    कभी बारिश में खड़े होकर आँखे मूंदकर मजा लीजिये !
    चित्र और पंक्तियाँ अच्छी लगी !

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  2. आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा , मैं बी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    मै नइ हु आप सब का सपोट chheya
    joint my follower
    वाह यह बारिश .....खूब आनंद लीजिये ...!

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  3. बहुत सुन्दर चित्रमय प्रस्तुति।

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  4. बाद में बारिश चाहे जो भी हाल करे जब आती है तो स्वागत खुश हो कर ही किया जाता है.

    सुन्दर चित्रमय पोस्ट.

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