बिना बात के
बात नहीं करना चाहिए ,
प्यार हो जाता है ।
"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।
गुस्सा स्वयं को अनुशासित करता है।
प्यार अनुशासन में रियायत की गुहार करता है।
अनुशासन प्यार को कच्ची मौत देता है।
मैं अनुशासन तोड़ना चाहता हूँ।
पुल इतना सहज हो कि
सड़क सा लगने लगे तब नदी हाशिये पर चली जाती है।
"मोहब्बत जब इतनी सादगी से हो कि
विसाले यार की तलब न हो तब दुनिया हाशिये पर चली जाती है।"