सोमवार, 2 सितंबर 2013

" आश्रमों के पीछे का सच ....."



इतना अच्छा बोलता था टी वी पर , कितना चमकदार और रोबदार चेहरा ,कितनी ज्ञान की बातें और अब ऐसे आरोपों से घिरा हुआ। सच क्या है , ऐसा क्यों होता है ,क्या हैं ये 'आसाराम' सरीखे बाबा !! आम आदमी के मन का बड़ा सरल सा प्रश्न ।

ईश्वर में आस्था और भक्ति होने के साथ अनजाने में ही लोग चमत्कार की कल्पना और उसमें सहज विश्वास करने लगते हैं । बचपन से ही बड़ों का आदर, गुरुओं और सन्यासियों का सम्मान और उनसे आशीर्वाद लेने का उपक्रम करते करते कब मन में इन चमत्कारी बाबाओं के प्रति अगाध श्रद्धा की बात घर कर जाती है ,भान ही नहीं रहता । ऐसे में साथ में रहने वाले हमारे बड़े लोग अगर सतर्क न हो और स्वयं भी ऐसे लोगों में अगाध आस्था और विश्वास करते हो तब उनके आस पास के लोगों में ऐसी ही धारणा पनपना निश्चित है ।

जीवन में सदैव आशा और निराशा का एक साथ ही वास होता है । कोई कितना भी सक्षम क्यों न हो ,उसकी भी कोई न कोई अभिलाषा अपूर्ण ही रहती है । ऐसे में अचानक से कहीं कोई आशीर्वाद के रूप में चमत्कार होने की बात प्रबल कर दे तब उसका भटकना तय है । घर घर भिक्षा मांगने वाले भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि महिलाओं को उनके बच्चों की सफलता के नाम पर कुछ भी माँग कर उसे प्राप्त कर लेना सबसे आसान काम है । जो भरे पूरे हैं उन्हें उसे बचाए रखने की चिंता और जो आधे अधूरे हैं उन्हें उसे पूरा करने की चिंता ही ,किसी भी भाँति , इन साधुओं की ओर खींचती है ।  

किसी भी प्रवचन में कोई ऐसी बातें नहीं होती जो किसी को ज्ञात न हो । ऐसे किसी भी आयोजनों में वहां का वातावरण इतना सुगन्धित ,सुसज्जित , शांत और मनमोहक होता है और वही व्यक्ति के चित्त पर गहरा असर करता है और व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देता है कि वहां कुछ तो विशेष है । उस पर से वहां बोलने वाले बाबा की सादगी , भाषा , संगीत और चंद बड़े लोग कुल मिला कर आग में घी का काम करते हैं । भीड़ भाड़ देख कर आम लोग स्वतः आश्वस्त हो जाते हैं ,वहां की सत्यता के प्रति , जबकि होता ऐसा कुछ भी नहीं है । सुगन्धित पदार्थों का प्रयोग , धूप ,अगरबत्ती ,मधुर भजन ,सुन्दर महंगे साज सज्जा की सजावट  ,कहीं भी कर दी जाय तब ऐसा ही प्रभाव हो सकता है ।

ईश्वर में आस्था रखना और किसी अन्य के द्वारा चमत्कार करने की क्षमता में विश्वास करना दो अलग अलग परन्तु बहुत सूक्ष्म अंतर की बातें है । समझना होगा कि सभी अन्य व्यक्ति भी आम जन की तरह ही हैं ,किसी ,साधू ,सन्यासी ,बाबा को यह शक्ति हासिल नहीं है कि वह आपके लिए कुछ कर देगा । अपनी पूजा स्वयं ,करें ईश्वर में आस्था रखे ,उससे आपको संबल मिलेगा और आपके ही कर्म से समस्या का निवारण होगा । यह बात अवश्य सत्य है कि पूजा पाठ से मन , चित्त और घर सुगन्धित और शांत हो जाता है ,जिसे 'अरोमाथिरेपी' कह सकते हैं । यह बाबा लोग बस इसी 'थिरेपी' के सहारे लोगों का विश्वास हासिल करते हैं जो धीरे धीरे अंधविश्वास बन जाता है ।

इस तरह की घटनाएं ( महिलाओं के शोषण की ) स्वयं सिद्ध करती हैं कि ऐसे बाबा साधारण मनुष्य ही हैं ,परन्तु चूंकि समय बीतने के साथ उनका कद इस कदर बढ़ चुका होता है कि भुगतने के बाद भी वह मुंह खोलने का साहस नहीं जुटा पाती और इसी चुप्पी का लाभ लेकर वह बाबा अपना आश्रम ऐसे लोगों से सजाता रहता है । ऐसी जगहों पर नामी -गिरामी लोगों के आने जाने से साधारण व्यक्ति इतना सहमा हुआ होता है कि उसके पास विश्वास करने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं होता । उदाहरण के तौर पर साईँ बाबा के भक्त 'कलाम साहब' भी रहे और 'सचिन तेंदुलकर' भी , जबकि साईं बाबा भी आसाराम से कम धूर्त नहीं थे ,अब कलाम साहब और सचिन की योग्यता पर तो किसी को कोई संदेह नहीं है ,न ही मुझे है पर आम लोग यह नहीं जानते कि सचिन और कलाम साहब ने उन पर अंध विश्वास कर अपने कर्मों से समझौता कभी नहीं किया । परन्तु इतने बड़े व्यक्तित्व का उनके यहाँ आना जाना देख कर जाहिर है आम आदमी तो अंध भक्त हो ही जाएगा । अतः ऐसे बड़े लोगों का भी दायित्व है कि ऐसी झूठ मान्यताओं को उन्हें बढ़ावा नहीं देना चाहिए । 

यह साधू ,सन्यासी, बाबा अकेले रहते है और चूंकि साधारण मनुष्य ही हैं तब उनमें भी आम लोगों की तरह सभी आवश्यकताओं का जन्म लेना साधारण सी बात है । वह कोई परमहंस नहीं कि उन पर महिलाओं और लड़कियों की संगत का प्रकृति-जन्य असर नहीं होगा और तभी फिर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं ।

ऐसी घटनाओं बहुत होती हैं और उजागर तभी हो पाती हैं तब कभी कभार किसी की आत्मा कचोट उठती है ,अन्यथा अनेक बाबा इसकी आड़ में खूब फूलते फलते रहते हैं । इस दिशा में मीडिया ने भी ख़ास कर 'टी वी' ने भी ऐसे चमत्कारी बाबों को बहुत प्रोमोट किया है । आम आदमी अपनी महत्वाकांक्षा पूरा करने चक्कर में इन सब में ऐसा उलझता है कि बस उसके हाथ चंद मालाएं , ताबीज , अंगूठी , कीमती परन्तु बेजान पत्थर और ऐसे आश्रमों के चक्कर ही आते हैं । सब कुछ लुट जाने के बाद वह लाज के भय से किसी से कुछ कह भी नहीं पाता । 

इन आश्रमों में प्रवचन ने एक उद्दोग का रूप ले लिया है ।लाखों करोड़ों का टर्न ओवर है । यह आश्रम बड़े घरानों के ब्लैक मनी को व्हाईट करने का काम बखूबी करते हैं । इस पर एक बार स्टिंग ऑपरेशन भी हो चुका है परन्तु सब बड़े लोग आपस में मिले हुए हैं । किसी का कुछ नहीं होना, बस आम आदमी यूं ही बेवकूफ बन कर इन आश्रमों के उद्दोग का 'रा मटीरियल' बनता रहता है     

बहुत सरल सी बात है ,पूजा पाठ , ईश्वर का ध्यान , यह सब सब स्वयं करने से ही मन को शान्ति मिल सकती है और फिर इसी शांत मन की ऊर्जा से बड़े से बड़े मनोरथ सिद्ध हो सकते हैं । इस काम के लिए कोई अन्य व्यक्ति कितना बड़ा भी सिद्ध ( ढोंगी ) क्यों न हो ,आपकी सहायता नहीं कर सकता ।

जब तक हम इन बातों को नहीं समझेंगे , उँगलियों में रत्न पहनना नहीं छोड़ेंगे , धूर्त पाखंडियों से शंख बजवाते रहेंगे , इन लाल होते बाबाओं के आश्रमों में जा कर इनके चरण छूते रहेंगे , इनके आचरण ऐसे ही मिलेंगे ।


                                                     ( दिखावे पर मत जाओ अपनी अकल लगाओ  )   

13 टिप्‍पणियां:

  1. Prophets of dooms day वि‍कसि‍त देशों में भी आए दि‍न ढेरों चेलाें को इकट्ठे कि‍ए रहते हैं, हमारे यहां तो फि‍र भी शि‍क्षा का प्रसार अभी कम माना जाता है. बाबाई और नेताई के धंधों से बढ़ि‍या कुछ नहीं, यहां कभी मंदी नहीं आने वाली

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  2. ऐसे बाबाओं को हम ही भगवान समझने की भूल करते हैं और बाद में उनकी करतूतों पर शर्मिंदा होते है.

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  3. इतना सब देखने के बाद भी लोगों की आँख नहीं खुलती ...

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  4. vishvas kro per andh vishvas nhi suno sabki kre apni man ki ye nhi ki bhed chal ek ne pooja to sabhi ,shuru , vo khavt he gav kre jo geli fir pachtane se kya fayda

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  5. इन्सान मानसिक तोर पे कमजोर है औए ये उनका फायदा उठाते हैं ... तभी तो इतने फोलोअर होते हैं इनके ...

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  6. सही है … जब तक आम आदमी बेवकूफी करना नहीं छोड़ता ऐसे ढोंगियों का धंधा फलता-फूलता ही रहेगा ....

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  7. अब तुमको पार्टटाइम प्रवचन का काम शुरु कर देना चाहिये। :)

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  8. जिसको जिस तरह का निर्वाण चाहिये होता है, मिल जाता है।

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