मंगलवार, 17 मई 2011

"अनुत्तरित"

"उठो,

चादर ठीक कर दूँ,

सलवटें  पड़ गई हैं |"

मैंने कहा था |

"और मन पे जो,

छोड़ जा रहे हो,
  
सलवटें,

उनका क्या" 

उसने पूछा था |

बिना उत्तर,

दिए,

तेज़ क़दमों,

से,

निकल,

आया था,

बाहर, 

मै |

                (आज भी वो सवाल अनुत्तरित है ) 

  
  

26 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul theek kha aapne amit ji...

    "शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"।

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  2. बनी सलवटें, वही रहीं,
    बस आँखें थी और बहीं।

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  3. अक्सर लोग यूँ ही सवालों से निकल जाते हैं , क्योंकि कोई जवाब नहीं होता - समझदारी में उसे अनुत्तरित छोड़ देना आसान लगता है

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  4. kuch sawal aise hi hote jinke utar jindgi bhar hame nhi milte.. vo sawal hi rahte hai...

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  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. कुछ सवाल सचमुच ऐसे ही होते है अमित जी जिनका उत्तर तलाशने में पूरा जीवन समाप्त हो जाता है, और जब उत्तर मिलता है तब तक काफी वक्त निकल गया होता है|
    शायद जिंदगी इसी का नाम है............................

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  7. अनुत्तरित प्रश्न....
    कोमल भावों की ह्रदयश्पर्सी रचना

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  8. कुछ उत्तर कभी न ही मिले तो अच्छा........उनमे एक ये भी........बढ़िया.

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  9. हाँ जवाब को समेटे हुए अनुत्तरित सवाल ..बहुत बढ़िया

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  10. कुछ प्रश्न जीवन भर अनुत्तरित ही रहते हैं …………चंद शब्दो मे कमाल की भावाव्यक्ति।

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  11. मैं क्या बोलूँ अब....अपने निःशब्द कर दिया है..... बहुत ही सुंदर कविता.

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  12. "और मन पे जो छोड़ जा रहे हो,
    सलवटें,
    उनका क्या" behad khoobsurti bhari pangtiyan hain.

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  14. .

    एक ही उत्तर है - " इन सलवटों के साथ भी मुस्कुराना सीख लिया जाये"

    Very touching creation !

    .

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. कुछ प्रश्न अनुत्तरित ही अच्छे लगते है
    अच्छी रचना ..........

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  17. सवाल का जवाब बिना दिए ?
    एक अनुत्तरित प्रश्न ?
    भावों का सुन्दर समावेश |

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  18. पहली बार आपके ब्लाग पर आया हूं, वाकई आपकी रचनाओं को पढ़ने कर लगा कि मै पहले क्यों नहीं यहां आ पाया। इंजीनियरिंग से जुड़े होने के बाद भी ऐसी हिंदी और भाव.. क्या बात है.
    भावपूर्ण रचना..

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  19. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  20. कुछ लोगों के पास जवाब ही नहीं होता...!

    परिस्थिति से नज़रें बचा कर निकल जाना ही बेहतर होता है..!!

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  21. क्या कोमल अहसास हैं..कुछ शब्दों में बहुत कुछ कह दिया..

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  22. आदरणीय अमित जी,
    यथायोग्य अभिवादन् ।

    सलवटों की वजह वक्त भले ही भूला दें, लेकिन यह सलवटें तमाम उम्र यक्ष प्रश्न बन साथ रहेंगी? इन्हीं सलवटों के बीच अपना सब कुछ पाने के लिय,े भले ही खुद को लेकिन जबाव तो देना ही होगा?
    शुक्रिया।
    ------------------
    रविकुमार सिंह http://babulgwalior.blogspot.com/

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  23. सवालों से भाग जाना आसान लगता है ...
    बहुत धार-दार ..
    यहाँ पधारें ...आपका स्वागत है
    http://shikhagupta83.blogspot.in/

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