बुधवार, 1 जुलाई 2020

सैलाब .....

बारिश
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बादल जब सागर का समर्पण संजोते संजोते थक जाते हैं और हवाएं भी साथ नही देती तो बारिश बन फना हो जाते हैं।

आँसू
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लम्हे जब घूंट घूंट तन्हाई पीते रहते हैं और यादें भी साथ नही देतीं तो आंसू बन घुल जाते हैं।

सैलाब
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जब बारिश और आंसू साथ साथ आ जाये तो सैलाब आता है।

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