शनिवार, 24 मई 2014

" कुछ ख्वाबों / ख्वाहिशों को नाम नहीं दिए जाते ......"


खुद का एहसास होने के लिए कुछ लिखना जरूरी है ,
पर उसके लिए खुद का आसपास होना भी तो जरूरी है ।

खुद को ढूँढा तो पाया आगोश में उनकी ख्वाहिश के ,
अब आगोश इस कदर हो तो तड़पना भी जरूरी है ।

ढुलक जाए लाख आँसू उनकी यादों में ,
पर नाम उनका लूँ तो मुस्कुराना भी जरूरी है ।

मोहब्बत मुझसे वो करें न करें मर्जी उनकी ,
पर मेरी हिचकियों का हिसाब लेना जरूरी है ।

ख़्वाब में है ख्वाहिश या ख्वाहिश उनके ख्वाब की ,
उनसे नज़र एक बार मिलाना भी तो जरूरी है ।

अकेले में वो तबस्सुम लिए फिरते तो हैं होंठों पे ,
इश्क हमी से है उनको तसदीक करना भी तो जरूरी है ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. ढुलक जाए लाख आँसू उनकी यादों में ,
    पर नाम उनका लूँ तो मुस्कुराना भी जरूरी है ।

    प्रेमपगे अहसास .....

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  2. मोहब्बत मुझसे वो करें न करें मर्जी उनकी ,
    पर मेरी हिचकियों का हिसाब लेना जरूरी है ।


    ये लाइन दिल को छू गयी।

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  3. खुद को ढूँढा , पाया , आंसू , हिचकी , यादे ....
    मुकम्मल ग़ज़ल !

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