शनिवार, 23 नवंबर 2013

" मैगी कल्चर………"


पुराने समय में भूख लगने पर तुरत फुरत में लोग सत्तू को पानी के साथ मिला कर खा लिया करते थे । मीठा और नमकीन दोनों ही तरह से सत्तू आम /मिर्चे के अचार के साथ बहुत स्वादिष्ट और साथ में पौष्टिक भी होता था । फिर भी इसे बनाने में कुछ समय तो लगता था ।

अब छोटे बच्चों को बचपन से ही 'मैगी' खाने को मिल जाती है । यह दो मिनट से भी कम समय में बन जाती है । टी वी में दिखा दिखा कर क्या बच्चे क्या बूढ़े सभी को इसका दीवाना बना दिया है कम्पनी  ने । माओं को भी आराम है झट से बन जो जाती है यह ।

बच्चा बोला ,मम्मी मम्मी भूख लगी ,माँ बोली बस दो मिनट ,और हो गया भूख का इलाज । यहाँ तक तो सब ठीक है परन्तु इस दो मिनट की मैगी ने बड़े होने वाले समाज के मन में सब कुछ बस दो मिनट में तैयार होने की आकांक्षा पैदा कर दी । यह बहुत दुर्भागयपूर्ण है । आज समाज में सभी के मन में सब कुछ बस तुरत फुरत में हासिल करने की लालसा व्याप्त है । इसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं चाहे वह लड़के हों या लडकियां । इसी लालसा को पूरा करने के चक्कर में वे ताकतवर लोगों के हाथों अपना शोषण करा बैठते हैं ।

'शार्ट कट' / 'मैगी कल्चर' के चक्कर में ही वर्तमान समाज में  महिलाओं के शोषण की घटनाएं घटती हैं चाहे वह घटना 'ला इंटर्न' की हो , चिकित्सा क्षेत्र में 'एम एस' पास करने की हो , 'पी एच डी' पूरी करने की हो , विदेश के उच्च संस्थान में 'रिकमेंडेशन' कराने की हो , पत्रकारिता के क्षेत्र में हो या निजी कंपनियों में आउट ऑफ़ टर्न प्रोमोशन की हो । धन , वैभव ,यश ,कीर्ति सब पाने में कठोर श्रम ,लगन और समय की आवश्यकता होती है ।

बड़े होते युवक तुरंत हाथों में लेटेस्ट मोबाइल , लेटेस्ट बाइक और आठ दस क्रेडिट कार्ड जेब में रख घूमना चाहते हैं । उनके पास इसे अपने बूते हासिल करने के लिए समय नहीं है । उन्हें तो लत 'मैगी कल्चर' की पड़ गई है । जिसे पूरा करने के लिए वह बड़े से बड़ा अपराध कर डालते हैं और बंगलौर जैसी एटीएम की घटनाएं घट जाती हैं ।

इस 'मैगी कल्चर' को प्रोत्साहन देने का काम 'ई एम आई कल्चर' ने बखूबी किया है । महंगे से महंगा सामान कार /बाइक / मकान 'लोन' ले कर ले लिया ,जब किश्ते न चुका पाये तो अपराध की दुनिया में कदम पड़ जाते हैं । महिलाओं से 'चेन स्नैचिंग' की घटनाओ में पकड़े गए अनेक युवकों ने कबूल किया है कि वे यह काम अपनी 'गर्ल फ्रेंड' को 'गिफ्ट' देने या 'बाइक' की 'ई एम आई' भरने के लिए करते हैं और अमूमन ये युवक अच्छे घरों से पाये गए हैं । दूसरों के खातों से 'अकाउंट हैक' कर पैसा उड़ा लेने वाले पकड़े गए युवक तो काफी पढ़े लिखे और कम्प्यूटर के विशेषज्ञ पाये गए । आसान पैसा बनाने का एक और तरीका इन अच्छे युवकों ने निकाला है ( जो स्वयं पढ़ाई में बहुत होनहार है) ,यह लोग प्रतियोगी परीक्षाओं में दूसरे बच्चों के स्थान पर परीक्षा देते हैं , जिसके बदले इन्हे मोटी रकम मिल जाती है और पकड़े जाने पर जेल जाते हैं और अच्छा खासा अपना बना बनाया भविष्य बिगाड़ लेते हैं । इनके विषय में जानकार सहानुभूति भी होती है ।

बचपन से बच्चों के मन में यह तथ्य स्थापित किया जाना आवश्यक है कि बगैर कठोर श्रम किये कुछ भी पा लेना आसान नहीं होता । समाज में पनप रहे इस 'मैगी कल्चर' से निजात पाना बहुत आवश्यक है । 

12 टिप्‍पणियां:

  1. इस मैगी कल्चर से हमने अपना कल्चर खो दिया है, इस मैगी कल्चर में जितना फ़ैट/कैलोरी हैं, उतनी अपने कल्चर में नहीं, अपने कल्चर में केवल मेहनत और बुद्धिमानी से धन कमाने पर जोर दिया जाता है, और मैगी कल्चर में पिज्जा/बर्गर वाली पीढ़ी हैकिंग से "इजीमनी" की कैलोरी चबा रही है, जिससे जेल जैसी बीमारियाँ उन्हें घेर रही हैं, क्योंकि यहाँ उन्हें पता ही नहीं चलता है कि जो कर रहे हैं, वह सही है या गलत !!!

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  2. कल 24/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  3. सनातन संस्कृति में 'मैगी कल्चर' की घुसपैठ हो चुकी है। आपने उसके कारणों का बड़ी बारीकी से अन्वेषण किया है। आपका आलेख बहुत पसंद आया।

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  4. सही बात .. .... यह कल्चर पूरी मानसिकता , पूरे मनोविज्ञान को प्रभावित करता है ....

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  5. सच, मैगी कल्चर ने तबाही मचा रखी है

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  6. jab nayi purani hulchul par title padha toh socha kuchh humor jaisa hoga par aapne bahut shaandar subject uthaya hai .. maggie khate khaate kab har cheez mein fast furious ki aadat ho gai pata hi nahi chalta.

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  7. maggie culture is costing many lives n souls.
    everybody's is in some kind of race.. running n running

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  8. हर काम का शोर्ट कट ढूंढा जाने लगा है आजकल. बहुत बढ़िया आलेख.

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  9. बहुत सही और बढ़िया बात .. बहुत ही रोचक ढंग से बताई आपने अमित जी !

    ~सादर

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