सोमवार, 26 मार्च 2012

" गुनगुनी सी रात....."



गुनगुनी सी रात में,
तुम्हे गुनगुनाना चाहता हूँ,
अनमने से मन को मनाना चाहता हूँ,
लग न जाए तेरी नज़र को मेरी नज़र,
उस नज़र की नज़र उतारना चाहता हूँ,
रह गई हर वो बात जो अनकही अनसुनी,
उसे सुनना और सुनाना चाहता हूँ,
मन ही मन दावे किये हैं बहुत इस दिल ने,
उन दावों को आज आजमाना चाहता हूँ ,
सच न लगे फिर भी मान लेना थोड़ा सा सच,
सच में प्यार जताना चाहता हूँ,
तुम तो एक फूल हो जिसमे ख़ुशबू है बहुत,
उस ख़ुशबू से थोड़ा महकना चाहता हूँ,
आवाज़ दूँ तो आ जाना ज़रूर,
जाते जाते बुझते चरागों  से तेरा दीदार चाहता हूँ ,
मरना ही सच है गर ज़िन्दगी का,
झूल कर तेरी बाहों में मरना चाहता हूँ | 

31 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर.....
    मन ही मन दावे किये हैं बहुत इस दिल ने,
    उन दावों को आज आजमाना चाहता हूँ ,

    हो सभी चाहतें पूरी......

    अनु

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्टस पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  3. रह गई हर वो बात जो अनकही अनसुनी,
    उसे सुनना और सुनाना चाहता हूँ,

    kuchh dil ne kaha......??

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  4. बहुत सुंदर प्रयोग करते हैं आप....
    खूबसूरत रचना....
    सादर।

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  5. अनमने से मन को मनाना चाहता हूँ,
    लग न जाए तेरी नज़र को मेरी नज़र,
    उस नज़र की नज़र उतारना चाहता हूँ,
    वाह... बहुत खूबसूरत चाहतें... शुभकामनायें... आभार

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  6. क्या बात है , लाजवाब रचना के लिए बधाई स्वीकार करिए .

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  7. बेहतरीन रचना..आशा है जल्दी ही ये तलाश असली रूप की, ख़त्म हो.. :)

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  8. गुनगुनी सी रात में,
    तुम्हे गुनगुनाना चाहता हूँ
    bahut komal kavita.....

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  9. सच न लगे फिर भी मान लेना थोड़ा सा सच,
    सच में प्यार जताना चाहता हूँ,
    तुम तो एक फूल हो जिसमे ख़ुशबू है बहुत,
    उस ख़ुशबू से थोड़ा महकना चाहता हूँ,
    आवाज़ दूँ तो आ जाना ज़रूर,
    जाते जाते बुझते चरागों से तेरा दीदार चाहता हूँ ,
    वाह वाह वाह बेहतरीन भाव संयोजन से सजी खूबसूरत प्रस्तुति ...

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  10. रह गई हर वो बात जो अनकही अनसुनी,
    उसे सुनना और सुनाना चाहता हूँ,
    बस यही तो सबसे जरुरी है.
    खूबसूरत भावपूर्ण रचना.

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  11. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति
    कल 28/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    ... मधुर- मधुर मेरे दीपक जल ...

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  12. तुम तो एक फूल हो जिसमे ख़ुशबू है बहुत,
    उस ख़ुशबू से थोड़ा महकना चाहता हूँ,
    आवाज़ दूँ तो आ जाना ज़रूर,
    जाते जाते बुझते चरागों से तेरा दीदार चाहता हूँ ,
    मरना ही सच है गर ज़िन्दगी का,
    झूल कर तेरी बाहों में मरना चाहता हूँ |
    bahut sunder
    rachana

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  13. बहुत सुन्दर , सार्थक सृजन.

    कृपया मेरे ब्लॉग meri kavitayen पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा .

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  14. अपने मन के भावों को प्रकट करने का यह तरीका अच्छा लगा । मेरे पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  15. रात गुनगुनी, बात गुनगुनी,
    स्वप्नों की सौगात गुनगुनी।

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  16. मेरी ख्वाहिशों का हर लफ्ज़ तुम हो
    मेरे ख्यालों का हर विम्ब तुम हो
    तभी तो ........ बहुत बढ़िया

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  17. झूल के तेरी बाहों में मरने की चाहत ....
    बहुत ही लाजवाब है चाहत है ... अच्छा लगा पढ़ के ....

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  18. waah kya baat hai har ek shabd dil me utarta hua .......bas aapki rachna gungunane ko ji chah raha hai . hardik badhai .


    meri nayi post sapne par

    http://sapne-shashi.blogspot.in/2012/03/blog-post_28.html

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  19. तुम तो एक फूल हो जिसमे ख़ुशबू है बहुत,
    उस ख़ुशबू से थोड़ा महकना चाहता हूँ,
    आवाज़ दूँ तो आ जाना ज़रूर,
    जाते जाते बुझते चरागों से तेरा दीदार चाहता हूँ ,
    मरना ही सच है गर ज़िन्दगी का,
    झूल कर तेरी बाहों में मरना चाहता हूँ |
    .......सुन्दर !!!!!

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  20. बहूत हि सुंदर.प्रेम रस से सराबोर रचना..
    बेहतरीन और लाजवाब प्रस्तुती....

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  21. .गुनगुनी सी रात में,
    तुम्हे गुनगुनाना चाहता हूँ,
    अनमने से मन को मनाना चाहता हूँ,
    लग न जाए तेरी नज़र को मेरी नज़र,
    उस नज़र की नज़र उतारना चाहता हूँ,.....बहुत सुन्दर .... भावों को बहुत ही सुन्दर शब्दो से पिरोए है..

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  22. मरना ही सच है गर ज़िन्दगी का,
    झूल कर तेरी बाहों में मरना चाहता हूँ |

    बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ,....क्या बात है
    अमित जी,...समर्थक बन रहा हूँ आपभी बने खुशी होगी,....आभार

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  23. मरना ही सच है गर ज़िन्दगी का,
    झूल कर तेरी बाहों में मरना चाहता हूँ |

    बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले ...
    शुभकामनायें आपको !

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  24. इतने चाहने वाले मिल जाते हैं कि चाहत पे मरने भी नहीं देते |

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  25. दिल की आरजू ...बहुत खूबसूरती से बयां की है ..
    शुभकामनायें ...!!

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  26. नजर की नजर उतारना तो ठीक है लेकिन ये बांहों में झूल के मरना कौन सा स्टंट है जी? ऊ का कुली हैं और आप सूटकेस :)

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