"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।
तुम कानों में झुमकों की जगह छोटी छोटी सी wind chime पहन लेना।
जब जब बजेगी समझना चुपके से कुछ कहा है हमने। फिर जवाब में खत लिख देना।
बस इत्ती सी ख्वाहिश है तुमसे।
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