शनिवार, 29 जुलाई 2017

" मै ,तुम और हम ......."


लोग बारिश की तमन्ना रखते हैं,
हम तो ओस में ही महक उठते हैं।
लकीरें थी तो अमीरी की मेरे हाथों में,
इश्क में उनके इश्क फकीरी से कर बैठे।
जानकर जान का हाल जानते नही वो,
जान जाती उनकी भी है मेरी जान पर।
सलामत रहे वो अपनी दरों दीवार में,
हम उनकी खुशबुओं में तसल्ली कर बैठे।

3 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " राजमाता गायत्री देवी और ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. सही कहा सच्चा प्यार वही होता है जो अपने प्यार की हर हालत में सलामती चाहता है।

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