मंगलवार, 29 जुलाई 2014

" ईद................"


चाँद देखा तुमने ,
तुम्हारी तो ईद हो गई ,
रोज़े हुए सब पूरे ,
खुशियां भी कैद हो गईं ।

कभी ख्याल ,
न आया उसका ,
ईद जिसकी होती ,
बस दीद से तुम्हारे ,

चाँद चाँद कहता वो ,
ढूंढता सबमें तुमको ,
छलकते आंसुओं से करता ,
वज़ू पाँचों वक्त वो सारे ,

दुआ में तुमको मांगे ,
तुम्हारी दुआ वो चाहे ,
मोहब्बत उसने की है ,
थोड़ा हक़ अता भी कर दो ,

थोड़ा तुम मुड़ के देखो ,
थोड़ा वो भी जी भर रो ले ,
यूं ही नज़रें मिला लो  ,
कभी उसकी भी ईद हो ले  ।  

12 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !! अनूठी रचना , मंगलकामनाएं आपको !

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  2. थोड़ा तुम मुड़ के देखो ,
    थोड़ा वो भी जी भर रो ले ,
    यूं ही नज़रें मिला लो ,
    कभी उसकी भी ईद हो ले ।

    बहुत ही सुन्दर

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31-07-2014 को चर्चा मंच पर { चर्चा - 1691 }ओ काले मेघा में दिया गया है
    आभार

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  4. उम्दा, बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें...

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  5. अच्छी भावपूर्ण रचना !
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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