मंगलवार, 14 जनवरी 2014

"......तो बात बने है "


अशआर यूँ तो सारे पढ़ लिए मैंने तेरे ,
अल्फाज़ एक दो कह दो तो बात बने है ।

दीदार जाने कब हो  रब ही जाने जब हो ,
तसव्वुर में आके  न जाओ तो बात बने है ।

मोहब्बत मैंने की है आँखें तो तर ही होंगी ,
थोड़ा तुम भी तर-बतर हो लो तो बात बने है ।

मरते थे तुम पे  कब से अब मर ही मिटेंगे ,
यूँ तुम भी जी कर देखो तो बात बने है ।

बदनाम था तो यूँ भी कुछ और हो कर देखूँ ,
कुछ नाम तुम भी कर दो तो बात बने है । 

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीयचर्चा मंच पर ।।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मकर संक्रांति की हार्दिक मंगलकामनाएँ - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. कल 16/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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