"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।
so sweet...:-)
कोमल खूबसूरत अहसाह ..
बहुत सुन्दर अमित जी...सादरअनु
जो सदा लुभाये, सारी तिथियों से परे।
दिल को छू हर एक पंक्ति...
waah
वाह बहुत खूब अ-तिथि बन कर कम से कम साथ तो बना रहेगा
बहुत सुंदर ...
तिथियों के बेहतरीन संयोगदिवस पर..क्या खूब रचना प्रस्तुत की है।।।
बहुत सुंदर अमित जी
bahut sundar rachna
gajab .... :): नम मौसम, भीगी जमीं ..
बहुत खूबसूरत
:) pyare se ahsaas... khubsurat.... 'अ-तिथि' achchhha laga ye shabd:)
so sweet...
जवाब देंहटाएं:-)
कोमल खूबसूरत अहसाह ..
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर अमित जी...
जवाब देंहटाएंसादर
अनु
जो सदा लुभाये, सारी तिथियों से परे।
जवाब देंहटाएंदिल को छू हर एक पंक्ति...
जवाब देंहटाएंwaah
जवाब देंहटाएंवाह बहुत खूब
जवाब देंहटाएंअ-तिथि बन कर कम से कम साथ तो बना रहेगा
बहुत सुंदर ...
जवाब देंहटाएंतिथियों के बेहतरीन संयोगदिवस पर..क्या खूब रचना प्रस्तुत की है।।।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अमित जी
जवाब देंहटाएंbahut sundar rachna
जवाब देंहटाएंgajab .... :)
जवाब देंहटाएं: नम मौसम, भीगी जमीं ..
बहुत खूबसूरत
जवाब देंहटाएं:) pyare se ahsaas... khubsurat....
जवाब देंहटाएं'अ-तिथि' achchhha laga ye shabd:)