गुरुवार, 6 मार्च 2014

" कुछ तो है ........."


कुछ तो है.........

नैना खिलखिलाते हैं ,

अधर मिचमिचाते हैं ,

कपोल भिंचे जाते हैं ,

स्याह लटें डोलती हैं ,

कुछ तो है.........

बालियां बोलती हैं ,

बिंदिया बहकती है ,

आवाज़ महकती है ,

कनखियाँ घूरती हैं ,

कुछ तो है........

मन कुरेदता है ,

तन सिमेटता है ,

राहें डोलती हैं ,

बाहें खोलती हैं ,

कुछ तो है.........

रोते रोते हंसती हैं ,

हँसते हँसते रोती हैं ,

कसमें कसमसाती हैं ,

स्मृतियाँ उभर आती हैं ।

कुछ तो है..........

11 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तो है ???
    पता चले तो बताइयेगा :-)

    सादर
    अनु

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  2. आपकी लिखी रचना शनिवार 08 मार्च 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. स्मृतियों की दस्तक यूँ ही नहीं...... कुछ तो है ....

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  4. बड़े ही नाज़ुक से तार छेड़ गयी आपकी अभिव्यक्ति .......

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  5. सुंदर अभिव्यक्ति। मेरे नए पोस्ट DREAMS ALSO HAVE LIFE.पर आपका इंतजार रहेगा। शुभ रात्रि।

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  6. फागुन में कुछ तो होना भी चाहिये...

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  7. "रोते रोते हंसती हैं, हँसते हँसते रोती हैं" दुखदायी समय में भी मन को प्रसन्न रखना चाहिये ....

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