मंगलवार, 22 नवंबर 2011

"कभी ऐसा भी हो"


कभी ऐसा भी हो,
मैं कही गुम जाऊँ,
ढूंढूं खुद को,
पर ढूंढ ना पाऊँ,
हाँ ! खोजो तुम,
तुमको मिल जाऊँ,
पर तुमसे खुद को,
माँग ना पाऊँ,
खुद को छोड़,
तुम्हारे पास,
लौट आऊँ,
फ़िर याद करूँ ,
खुद को अक्सर,
तो याद तेरी भी,
आ जाये,
कभी ऐसा भी हो,
किताब पढूँ मैं जब,
अक्स उभर आये ,
पन्नों पे तेरा,
पन्ने पलटूँ जब,
लब तेरे छूँ जाये,
कभी ऐसा भी हो,
तू नींद में हो ,
और मै,
ख़्वाब में आऊँ !! 
कभी ऐसा भी हो,
कुरेदो नाम ज़मीं पे मेरा,
और टिका दो ,
उस पे हथेलियाँ,
उधर वो नाम मिट जाए,
इधर मैं मिट जाऊँ !!! 

11 टिप्‍पणियां:

  1. कभी ऐसा भी हो,
    मैं कही गुम जाऊँ,
    ढूंढूं खुद को,
    पर ढूंढ ना पाऊँ,
    हाँ ! खोजो तुम,
    तुमको मिल जाऊँ,
    पर तुमसे खुद को,
    माँग ना पाऊँ,

    Bahut sunder line..khwabo ki tarah....

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  2. कभी ऐसा भी हो,
    कुरेदो नाम ज़मीं पे मेरा,
    और टिका दो ,
    उस पे हथेलियाँ,
    उधर वो नाम मिट जाए,
    इधर मैं मिट जाऊँ !!!

    लाजवाब...

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  3. लाजवाब प्रस्तुति ....बधाई समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/2011/11/blog-post_20.html

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  4. कभी ऐसा भी हो,
    तू नींद में हो ,
    और मै,
    ख़्वाब में आऊँ !!
    कभी ऐसा भी हो,
    कुरेदो नाम ज़मीं पे मेरा,
    और टिका दो ,
    उस पे हथेलियाँ,
    उधर वो नाम मिट जाए,
    इधर मैं मिट जाऊँ !!!

    khoobsoorat ehsaas...!!

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  5. बड़ी हसीन तम्मानायें हैं। सब पूरी हों!

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