"बस यूँ ही " .......अमित

"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

आंखें/नज़्म

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नींद न पूरी हो तो आंखे इश्तिहार हो जाती हैं। नज़्म भी एहसासों का इश्तिहार ही तो है । "यानी आंखों को नज़्म कहना गुनाह नही।" सुबहें सा...
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

कुछ तो नया करें।

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सोचता हूँ ज़िन्दगी में ऐसा कुछ नही किया जिस पर फख्र किया जा सके। पूरे जीवन मे एक बानगी तो ऐसी हो जिसके सहारे इस जीवन रूपी गिफ्ट के बदले ईश्वर...
रविवार, 12 अप्रैल 2026

गेहूँ की कटाई

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आग जलने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है, इसे फायर ट्रायंगल भी कहते है, ऑक्सीजन, जलने वाला पदार्थ और अग्नि। इसे बुझाना हो तो या तो आग के...
मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

चौकोर चाँद

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चाँद गोल न होकर चौकोर या तिकोना होता तब  शायद इतना ज्यादा खूबसूरत नही होता। दरअसल गोल चीज़ का कोई सिरा नही होता तो किसी सिरे या छोर के अभाव म...
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सोमवार, 6 अप्रैल 2026

तकिया बांहों का।

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 "सेमल की नई रुई आने वाली है । दो तकिए लेने हैं इसके ।" -अच्छा ।  "फोम वाली सॉफ्ट तो है पर अच्छी नहीं । " - हाँ ,पर वो र...
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लिखते क्यूँ हो।

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'यह सुबह / शाम लिखते रहते हो और कोई काम नही है।' तुम मुझे पढ़ना छोड़ दो न, मैं लिखना छोड़ दूंगा। 'फिर इन आँखों का क्या काम।' 
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इल्ज़ाम

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 उनका इल्ज़ाम लगाने का  अंदाज ही कुछ गज़ब का था, मैंने खुद अपने ही ख़िलाफ  गवाही दे दी। ---------------------------------------------------...
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