"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं,
मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।
सही कहा आपने हम अक्सर चाय को सिर्फ एक पेय समझते हैं, लेकिन असल में वह एक बहाना बन जाती है दिल से जुड़ने का। जब कोई हमें चाय ऑफर करता है, वह दरअसल हमें समय देता है, हमारी बात सुनना चाहता है और साथ में कुछ पल बिताना चाहता है। मुझे लगता है कि रिश्तों की असली गर्माहट भी उसी चाय की तरह होती है, धीरे-धीरे घुलती है और मन को सुकून देती है।
सही कहा आपने हम अक्सर चाय को सिर्फ एक पेय समझते हैं, लेकिन असल में वह एक बहाना बन जाती है दिल से जुड़ने का। जब कोई हमें चाय ऑफर करता है, वह दरअसल हमें समय देता है, हमारी बात सुनना चाहता है और साथ में कुछ पल बिताना चाहता है। मुझे लगता है कि रिश्तों की असली गर्माहट भी उसी चाय की तरह होती है, धीरे-धीरे घुलती है और मन को सुकून देती है।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंWelcome to blog new post