मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

चौकोर चाँद

चाँद गोल न होकर चौकोर या तिकोना होता तब  शायद इतना ज्यादा खूबसूरत नही होता।

दरअसल गोल चीज़ का कोई सिरा नही होता तो किसी सिरे या छोर के अभाव में उसका बे अनुपात होना पता नही चलता। तिकोना अथवा चौकोर होने की स्थिति में  उस आकृति का किसी एक रिफरेन्स पॉइंट के सापेक्ष सिमेट्रिकल न होना उसे बदसूरत बना देता है।

रेफरेन्स पॉइंट न हो तो सारी बातें / चीज़ें / आकृतियां अच्छी एवम सुंदर  लगती हैं। बुराई तो सापेक्षवाद में दिखती है। 

"निरपेक्ष दृष्टि से कुछ भी बुरा अथवा कुरूप नही होता।"

सोमवार, 6 अप्रैल 2026

तकिया बांहों का।

 "सेमल की नई रुई आने वाली है । दो तकिए लेने हैं इसके ।"

-अच्छा । 

"फोम वाली सॉफ्ट तो है पर अच्छी नहीं । "

- हाँ ,पर वो रुई वाली है न । 

"वो थोड़ा क्रश मतलब पिच्च नहीं हो गई ।"

- हाँ , पर वो ठीक है अभी । 

"आपको रुई वाली कम्फर्टेबल लगती है या फोम की या फिर जो वो रखी है सेमल वाली ।"

- तुम्हारे बाँहों वाली ,सबसे कम्फ़र्टेबल ,फुसफुसाते हुए । 


(पर वो सुन न पाई धीमी सी आवाज़ , या शायद अनसुना कर दिया  हमेशा की तरह  )

लिखते क्यूँ हो।

'यह सुबह / शाम लिखते रहते हो और कोई काम नही है।'


तुम मुझे पढ़ना छोड़ दो न, मैं लिखना छोड़ दूंगा।


'फिर इन आँखों का क्या काम।' 


इल्ज़ाम

 उनका इल्ज़ाम लगाने का 

अंदाज ही कुछ गज़ब का था,


मैंने खुद अपने ही ख़िलाफ 

गवाही दे दी।

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अमित तुम्हें कैंसर है।

 अमित , तुम्हें कैंसर है।

Lung cancer 4th stage.

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तारीख 5 जनवरी 2026

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विभागीय इंस्टिट्यूट में क्लास लेने के दौरान थोड़ा सा महसूस हुआ कि breathlessness हो रही है पर सुबह जिम भी गये थे तो लगा थोड़ा exertion ज्यादा हो गया होगा। बात आई गई हो गई।

तारीख 14 जनवरी 2026

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सेवा निवृति के पश्चात कंसल्टेंसी जॉइन किया था। बस उसी आफिस से लंच के लिए घर आते समय घर के पास ही cardilogist डॉ अतुल अग्रवाल साहब का हॉस्पिटल है। ऐसे ही अचानक मन हुआ आज बीपी चेक करा लें बहुत दिन हुआ ,मिलना भी नही हुआ। मेरे बहुत अच्छे परिचित हैं और बहुत ख़्याल रखते हैं। 

भीड़ के मारे हम संकोच कर रहै थे पर उनके स्टाफ ने बता दिया तो उन्होंने फौरन बुलाया। हमने बताया सब ठीक है बहुत दिन हुए थोड़ा बीपी देखिए कुछ गड़बड़ तो नही।

वो बोले बीपी तो बाद में देखेंगे, पहले यह बताओ तुम हाँफ क्यो रहे। तुरंत उन्होंने पीठ पर आला लगाया और सीरियस हो गए। नाराज़ भी हुए पर मुझे समझ नही आया। उन्होंने तुरंत एक पैथोलॉजी में फोन कर मेरा PFT और चेस्ट xray करने को बोला। 

PFT 52% और xray में आधा lung गायब। फिर वापस गये अग्रवाल साहब के पास। तुरंत उन्होंने अपने कलीग डॉ के lung hospital में भेजा हमें।

संजीवनी लंग हॉस्पिटल के डॉ गुप्ता ने चेक अप किया और बोले या तो तुम्हे TB है या cancer. ईश्वर से pray करो कि TB ही हो।

उन्होंने पीठ पंचर करते हुए इंजेक्शन से फ्लूइड निकालने की कोशिश की। कुछ नही निकला। अब वो लगभग sure थे फिर उन्होंने बहुत सारे टेस्ट अल्ट्रासाउंड, ct scan किया। पर स्पष्ट नही हो रहा था और हमारी फिजिकल कंडीशन भी बहुत ही ठीक थी।

अंत मे उन्होंने PET SCAN कराने को बोला। तारीख 19 जनवरी को यह इमेजिंग हुई। उसके बाद भी हम नार्मल रूटीन में रहे, आफिस जाते रहे।

तारीख 23 जनवरी 2026

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आफिस से ही बैठे बैठे हमने pet scan की रिपोर्ट व्हाट्सप्प पर मंगाई। वो code में होती है , non medico को समझ नही आती है।

हमने उसे chatgpt पर डाल दिया। एक सेकेंड में आ गई finding : 4th stage lung cancer.

दो मिनट के लिए हम जड़वत हो गए। फिर पानी पिया। कार की चाभी उठाई और घर आ गए।

अपने बड़े भाई जो सर्जन भी हैं और अब सेवानिवृत्त के पश्चात एक निजी मेडिकल संस्थान में अध्यापन का काम कर रहे, उन्हें बताया तो तुरंत घर आ गए।

आगे तो bronchoscopy यानी biopsy ही होना था अब। उन्होंने तुरंत बोला कि मुम्बई में टाटा कैंसर हॉस्पिटल में ही आगे ट्रीटमेंट कराना है। उनके कॉलेज सीनियर डॉ राजीव सरीन वहीं टाटा में oncology के हेड और डायरेक्टर भी हैं। उनसे उनकी बात हुई, 27 जनवरी का फिक्स हुआ।

बड़ा बेटा मुंबई में ही है तो फौरन सब मैनेज होना शुरू हुआ।25 जनवरी को ही हम मुंबई आ गए।

तारीख 27 जनवरी 2026

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मन बहुत खराब हो चुका था इन बीते 13 दिनों में। टाटा की भीड़ देख कर खास कर बीमार बच्चों को देखकर बहुत तकलीफ हुई।

टाटा में चेक अप हुआ पर rush के कारण biopsy की तारीख 4 फरवरी मिली। जो dr sareen को लगा कि इसमे तो फिर ट्रीटमेंट शुरू में देर हो सकती है।

उन्होंने बेटे को बोला कि हिंदुजा अस्पताल में dr vijay patil है उनसे मिल लो, पहले वो भी उन्ही के साथ 12 साल टाटा में ही थे।

तारीख 29 जनवरी 2026

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डॉ पाटिल ने बहुत स्पष्ट समझाया कि क्या है और क्या लाइफ थ्रेट है। उन्हें लखनऊ की pet scan रिपोर्ट में कुछ traces ब्रेन में भी मिले। उन्होंने ब्रेन MRI कराई। 

तुरंत अगले दिन ही biopsy हुई, दवा शुरू करने की जल्दी के कारण blood biopsy भी कराई और उन्होंने हमारी target therapy 8 फरवरी से शुरू कर दी यानी एक टेबलेट रोज बस। 

उनका अगला सुझाव कि अगर इसके साथ कीमोथेरेपी भी की जाए तो रिजल्ट बेहतर होगा मगर उसके लिए पेशेंट का अंदर से तैयार होना बहुत जरूरी है।

हम डरे तो थे ही। chemo के लिए हिम्मत नही जुटा पा रहे थे पर अंत मे हाँ कर दिया।

हमारी पहली कीमो 18 फरवरी,

दूसरी कीमो 11 मार्च,

तीसरी अभी 1 अप्रैल को हो गई।

चौथी कीमो 22 अप्रैल को होगी।

अब उसके बाद फिर pet scan होगा उससे आगे का ट्रीटमेंट तय होगा।


खासबात- हम बिल्कुल अच्छे से हैं। progressing well, vitals ठीक हैं, चिंता की कोई बात नही है अब। 

यह पोस्ट लिखना इस लिए जरूरी लगा कि अब तक सबसे फ़ोन पर और इनबॉक्स में झूठ बोल बोल कर थक गया था। अधिकतर लोग शक कर रहे थे कि जिम की पिक नही आ रही, मुम्बई में इतने दिन क्यों, नए जॉब का क्या हुआ etc.

Life_is_so_unpredictable , क्या क्या नही सोच लिया इस बीच मगर यह समझ मे आया कि अंदर की मजबूती ही फाइट करने का सहारा बनती है बाकी दुनिया फिर बेमानी लगती है।


आगे अपना हाल देते रहेंगे। अब तो ठीक होना ही है ऐसा लगता तो है। बाकी दोस्तों और चाहने वालों की दुआएं बेकार नही जाने देंगे।


विशेष :इन सब के चक्कर मे बहुतों के पारिवारिक कार्यक्रमों, विभागीय क्लब के फंक्शन, बहुत अजीज़ लोगों की फेयरवेल पार्टीयों में, उनके बच्चों के शादी ब्याह में सम्मिलित नही हो सके और कोई न कोई झूठा बहाना ही बनाया था उन सबसे। अनुरोध है क्षमा करेंगे।

रविवार, 5 अप्रैल 2026

तुम।

मन्द ठंडी बयार है ,सोंधी खुशबू है। ढेरों गौरैया भी अपनी बीती रात के किस्से आपस मे चहचहा रही हैं। बादलों के कजरारे से टुकड़े बड़ी तेजी से बहे चले जा रहै हैं जैसे सोई हुई खूबसूरत आंखों से काजल का धुआं बह रहा हो उन्ही के गालों पे। 

बरसने का मन है आज शायद बादलों का और दास्तानों का भी।

"तुम कहीं आसपास तो नही।"

बचा हुआ हिस्सा।

शाम को कुछ लिख रहा था ,अधूरा ही रह गया। शाम भी अधूरी रह गई और बात भी। यूँ तो बहुत सी अधूरी शाम के बचे हुए टुकड़े इकट्ठे कर लिए हैं। यह रंग बिरंगे टेढ़े मेढ़े टुकड़े, शामों के ,एक साथ मिलकर एक खूबसूरत कोलाज बना देते है जो नीम अंधेरों में जुगनू सा दमकते रहते है।

"कभी कभी बचा हुआ हिस्सा जो अपने हिस्से नही आता, तमाम किस्से कह जाता है।"

काँटे।

आज एक पौधा देखा ,उसमे फूल कुछ ऊपर उठ कर खिलता है। उसमें कांटे भी है पर फूल शायद खुद उठ कर कुछ इस तरह खिलता है कि उसे छूने वाले को कांटे चुभ न सके। 

"व्यक्ति को भी ऊपर उठ कर खिलना चाहिए जिससे अगर उसकी संगत में कुछ कांटे हो भी तो किसी और को आघात न पहुंचायें।"



मन

पेड़ों के गलों में हाथ डाल चहलकदमी करने का जी करता है। 

हवाओं के रुख से बाल संवारने को जी करता है।

चिड़ियों से चोंच मिलाने का जी करता है।

तितलियों को पलकों पे धरने का जी करता है। 

शंख के कान में फुसफुसाने का जी करता है।

चांद की रोशनी में नदी का कोना खींच ओढ़ लेने का जी करता है। 

"अंगुलियों का अंगुलियों से बात करने का जी करता है।"

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

चंद्रमा और रात।

रात कितनी चुपके से आती है। कभी कभी तो मुझसे पहले से आकर कोने में बैठी मिलती है। वक्त का हिसाब रखना शायद रात को नही आता। किसी की दो पल में कट जाती है और किसी की एक रात ज़िन्दगी भर नही बीत पाती।

अगर चन्द्रमा के पटल पर दो सुइयां भी होती जो वक्त बताती रहती तो  फिर रात को वक्त बिताने के लिए खुले आसमान में एक घड़ी का सहारा मिल जाता।

"घड़ी पास हो तो वक्त अपना सा लगता है।"

सवेरा।

सवेरा रोज़ कितनी चुपके से आता है , फिर भी नींद खुल जाती है । 

तुम्हारी बातें भी तो ऐसे ही मुझ तक पहुँच जाती है चुपके से जबकि तुम कुछ बोलते ही नहीं । 

देखो फिर चिड़िया चहचहा रही हैं , यक़ीनन तुम आँखे खोल बरबस एक बार मुस्कुराये हो अभी ।

यह लालिमा सुबह की है या फिर एक बार ओढ़ ली है तुमने चादर लाज की ।

मोड़

साथ चलते चलते अक्सर किसी मोड़ पर ही लोग साथ छोड़ते हैं। मोड़ पर पीछे मुड़ कर देखने पर वह दिखता जो नही है। सीधे रास्तों पर अलग हुए तो बहुत दूर तलक तक वो दिखता रहता है और फिर मुंह मोड़ना आसान नही होता है शायद।


राहें बदलनी हो, बस मोड़ आने दो,

मुड़ कर न देखो, उन्हें बस दूर जाने दो।


#मोड़ज़िन्दगीके

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

प्यार

बिना बात के 

बात नहीं करना चाहिए , 

प्यार हो जाता है । 

अनुशासन

 गुस्सा स्वयं को अनुशासित करता है। 

प्यार अनुशासन में रियायत की गुहार करता है। 

अनुशासन प्यार को कच्ची मौत देता है।


मैं अनुशासन तोड़ना चाहता हूँ।

पुल

 पुल इतना सहज हो कि 

सड़क सा लगने लगे तब नदी हाशिये पर चली जाती है।


"मोहब्बत जब इतनी सादगी से हो कि 

विसाले यार की तलब न हो तब दुनिया हाशिये पर चली जाती है।"