"बस यूँ ही " .......अमित

"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।

गुरुवार, 23 मार्च 2017

" प्यार की प्रकृति ........."

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सूने आसमान पे चाँद, उजले माथे पे बिंदिया, चाँद पर तैरते बादल, आँखों से रिसता काजल, बुलबुल की आवाज़, जल तरंग सी साज़, रेशम रेश...
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सोमवार, 29 अगस्त 2016

"योर नोज़ इज़ वेरी टेस्टी........"

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उस उदास लड़के की अंगुलियाँ अपने हाथों में लिए यूं एक एक कर मोड़ तोड़ कर वह लड़की देख टटोल रही थी मानो वहां कहीं एक प्रेशर पॉइंट हो और उसे दबात...
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शनिवार, 11 जून 2016

" शून्य के भीतर शून्य ........."

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शून्य के भीतर भी , होते हैं बहुत सारे शून्य , जब जब तुम चुप रहे , शून्य धंसते गए , एक के भीतर एक , फिर एक और एक, कितनी भी बातें...
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रविवार, 10 अप्रैल 2016

" कैसा इत्तिफ़ाक़ है यह ........"

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'पता है क्या हुआ , लगभग चीखते हुए अंदाज़ में मधूलिका बोली उधर से फोन पर ।' मुझे लगा फिर शायद उसने चाभी कार में ही लगी छोड़ दी और क...
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गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

" एक रात पसरी हुई ........"

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(१ ) नींद , मत आया करो , जब वो हों ख्यालों में, सुला देना कभी , जब वो आना भूल जाएं , मुझे कभी न उठने के लिए । (२ ) रात , तुम ग...
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रविवार, 3 अप्रैल 2016

" मर के भी मुँह न तुझसे मोड़ना......... "

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प्यार में जान देने की कहानियाँ बहुत हैं । फिल्में भी खूब बनी हैं । गाने तो न जाने कितने बजते रहते हैं दिन भर इन्ही भावनाओं को व्यक्त करत...
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गुरुवार, 24 मार्च 2016

" लग जा गले कि फिर ........"

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प्रकृति में जीवन है ,इसे प्रतिपादित करने के लिए ईश्वर ने मनुष्य को जीवन दिया । मनुष्य के कण कण और रोम रोम में जीवन ऊर्जा प्रवाहित होती र...
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